और जब माँ ने पिता बन अपनी बगिया की हर कली को महकाया,पढ़े खास स्टोरी

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स्वास्थ्य विभाग में निभाई बखूबी जिम्मेदारी

3 वर्ष की उम्र में ही उठ गया था पिता का साया सिर से

जगतपुर(रायबरेली)
जी हां हम बात कर रहे हैं आज मनाई जाने वाली महिला सशक्तिकरण के अवसर पर उन लौह महिलाओ में से एक शिवकुमारी श्रीवास्तव पत्नी स्व.दिनेश नारायण निवासी रायबरेली रोड जगतपुर जिनकी हंसने-खेलने वाली उम्र जिसे बचपना कहते हैं तभी पिता का सहारा सिर से उठ गया।विधवा मां और ननिहाल पक्ष से नाना-नानी ने लालन-पालन किया।और शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेदारी निभाई।छोटी उम्र में ही शादी विवाह की जिम्मेदारी में बांध दिया गया। तीन बहनों और एक भाई का परिवार, विवाह के बाद ससुराल पक्ष से प्यार दुलार सम्मान ना मिलने पर अपने पैरों पर खडी हुई। जगतपुर के सान्हूँकुआ के पूरे हरभजन निवासी बडी बहन कृष्ण कुमारी और बहनोई रामशंकर श्रीवास्तव (रिटायर्ड कैशियर जिला सहकारी बैंक) ने आगे की शिक्षा का सहारा दिया। और मिडवाइफ साथ ही स्वास्थ्य पर्यवेक्षक की ट्रेनिंग लखनऊ सिल्वर जुबली कॉलेज से पूर्ण कराई।इसके बाद ईश्वर की इच्छा और बच्चों के लालन-पालन के लिए नौकरी की दरकार हुई तब स्वास्थ्य विभाग के महकमे जगतपुर में महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ए.एन एम के रूप में तैनाती मिली। संघर्षों का दौर अभी थमा नहीं था कि बेटियां भी शादी योग्य हो गई और साथ में बच्चों की पढ़ाई। दोनों बेटियों के हाथ में मेहंदी लगी एक की शादी फैजाबाद और दूसरे की लखनऊ में की।साथ ही साथ बड़े बेटे मनोज श्रीवास्तव को वकालत की पढ़ाई कराई और वकील बनाया,छोटे बेटे मनीष ने भी जनसेवा और शिक्षण का कार्य सँभाला। इतने संघर्षों में रहते हुए भी कभी हार न मानी कभी किसी के सामने ना गिड़गिड़ाई ना हीं आत्मविश्वास को ही की ढिगने दिया।सिर्फ अपने बाजुओं पर विश्वास रखा। यही नहीं समाज के जागरूक लोगों ने समय-समय पर मदद की और किसी भी प्रकार की बाधाएं आने पर सहारा देने का कार्य किया इस महिला सशक्ति दिवस में शिवकुमारी श्रीवास्तव की गाथा इतनी ही नहीं वह अपने जीवन में लगातार संघर्षों से जूझती रहीं और संघर्षों पर विजय प्राप्त करती रहीं। ऊंचाहार समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के रूप में रिटायर हुई ।आज अपने भरे पूरे परिवार के साथ हंसी खुशी से जीवन निर्वाह कर रही हैं ।ऐसा नहीं है कि कोई महिला कभी कमजोर होती है। बस आत्मविश्वास और बहुत कुछ जिम्मेदारी समाज की भी बनती है कि ऐसे लोगों को और अधिक मजबूती प्रदान करें और वक्त पर सहारा दे। तब कोई नारी कमजोर नहीं होगी।

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