कृषि में युवाओं की भागीदारी से ही कृषि का विकास सम्भव है – साध्वी निरंजन ज्योति, केन्द्रीय राज्य मंत्री

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बांदा। हमारे देश में कृषि में उन्नति हो रही है परन्तु आने वाली पीढ़ी का कृषि में रूझान कम हो रहा है। युवाओं में कृषि के प्रति जागरूकता आने हेतु हर सम्भव प्रयास किया जाना चाहिए। कृषि के क्षेत्र में किताबी ज्ञान के अलावा प्रयोगिक ज्ञान भी आवश्यक है यह बाते कृषि विश्वविद्यालय, बांदा में ‘‘जलवायु आधारित कृषि द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सतत विकास‘‘ विषयक आयोजित दो दिवसीय एग्रीविजन (पूर्वी उत्तर प्रदेश) की प्रथम क्षेत्रीय संगोष्ठी में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ने कहीं।

साध्वी ने बुन्देलखण्ड में गौवंशी पशुओं की बधाली पर चिन्ता व्यक्त करते हुए अहवान किया कि पशुओं को कृषि के मुख्य धारा में सम्मलित कर भारत को समृद्ध एवं गौरवशाली बनाने में योगदान दे। कृषक के बच्चो एवं शहरी क्षेत्र के बच्चों को कृषि के तरफ भी ध्यान देना चाहिए।

एग्रीविजन (पूर्वी उत्तर प्रदेश) की प्रथम क्षेत्रीय संगोष्ठी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों एवं छात्रों को जलवायु आधारित कृषि की विभिन्न तकनीको के बारे में जागरूक करना है। डा0 हरेश प्रताप सिंह, कुलसचिव, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर विशेष अतिथि रहे। अध्यक्षता बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति, डा0 यू0एस0 गौतम ने की इस अवसर पर श्रीहरि बोरिकर, अखिल भारतीय विश्वविद्यालय, कार्य प्रमुख (अ0भा0वि0प0), रमेश गड़िया, क्षेत्रीय संगठन मंत्री (पूर्वी उत्तर प्रदेश), गजेन्द्र तोमर, राष्ट्रीय संमन्वयक एग्रीविजन तथा प्रभाकर सिंह चन्देल, समाज सेवी एवं ज्येष्ट कार्यकर्ता (अ0भा0वि0प0) भी उपस्थिति रहें। अतिथियों का स्वागत डा0 ए0के0 सिंह, आयोजक सचिव ने किया।

इस अवसर पर पूर्वी क्षेत्र के काशी क्षेत्र, गोरक्ष क्षेत्र, अवध क्षेत्र, कानपुर क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि महाविद्यालयों से लगभग 150 छात्रो ने प्रतिभाग किया। प्रथम तकनीकि सत्र जलवायु आधारित कृषि तकनीकि में डा0 दीपा द्विवेदी, प्राध्यापक बाबा भीमराव अम्बेडकर, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा डा0 आर0के0 सिंह, सह-प्राध्यापक, सब्जी विज्ञान कृषि विश्वविद्यालय, बांदा तथा द्वितीय सत्र जलवायु परिवर्तन एवं पशुप्रबन्धन विषक तकनीकि सत्र में डा0 यू0के0 शुक्ला ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट तथा डा0 मंयक दुबे, सहायक प्राध्यापक, कृषि विश्वविद्यालय, बांदा ने अपने व्याख्यान दिये। प्रथम एवं द्वितीय तकनीकि सत्र के अध्यक्ष डा0 एच0पी0 सिंह, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा उपाध्यक्ष डा0 वी0पी0 मिश्रा, विभागाध्यक्ष कृषि प्रसार रहे। इस अवसर पर पूर्वी क्षेत्र के काशी क्षेत्र, गोरक्ष क्षेत्र, अवध क्षेत्र, कानपुर क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि महाविद्यालयों से लगभग 150 छात्रो ने प्रतिभाग किया। प्रथम तकनीकि सत्र जलवायु आधारित कृषि तकनीकि में डा0 दीपा द्विवेदी, प्राध्यापक बाबा भीमराव अम्बेडकर, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा डा0 आर0के0 सिंह, सह-प्राध्यापक, सब्जी विज्ञान कृषि विश्वविद्यालय, बांदा तथा द्वितीय सत्र जलवायु परिवर्तन एवं पशुप्रबन्धन विषयक तकनीकि सत्र में डा0 यू0के0 शुक्ला ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट प्राध्यापक डा0 बी0के0 गुप्ता तथा डा0 विज्ञा मिश्रा ने किया ।

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