केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है चित्रकूट का विकास

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चित्रकूट। सदियों से बाहरी लोगों के लिए आश्चर्य का केंद्र, त्रिदेवों की जननी स्थली चित्रकूट अपने आपमें अबूझ पहेली है। यहां पर आने वाला प्रत्येक व्यक्ति नयनाभिराम दृश्यों, पर्वतों, वनों नदियों व झरनों को देखकर आनंदित हो जाता है। यह क्षेत्र आजादी के बाद यूपी और एमपी में बांट दिया गया। जिसके कारण इसका विकास नही हो सका। पुराणों व वेदों के अनुसार चित्रकूट तीर्थ का क्षेत्रफल 84 कोस का है। 84 कोस में लगभग 500 से ज्यादा स्थानों पर आदि काल से लेकर अब तक हर एक पत्थर अलग गाथा सुनाता है। रघुकुल के तमाम राजाओं ने आकर यहां पर तप किया। ब्रहमा ने यहां पर तप कर सृष्टि उत्पन्न की। भारत रत्न नाना जी देशमुख ने यहां पर आकर विशाल प्रकल्प स्थापित कर 500 गांवों में शिक्षा स्वास्थ्य और स्वावलंबन की अलख जगाई। उन्होंने इस क्षेत्र को केंद्र सरकार से लेने का कई बार अनुरोध किया। पूर्व प्र्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने इसे यूनियन टेरेटरी करने का आश्वासन दिया था।

जगद्गुरू स्वामी राम भद्राचार्य सहित तमाम संत तो इसे ईसाईयों के वेटिकन सिटी की तर्ज पर हिंदुओं की आध्यात्मिक तपोस्थली राजधानी घोषित करने की बात वर्षों से करते रहे हैं। जूनागढ अखाड़े के महामंडलेश्वर यतीन्द्रानंद गिरि जी महराज ने इस समस्या का समाधान केद्र सरकार से निकालने के लिए अपने विचार दिए।

संदीप रिछारिया

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