पानी एवं पोषण पर चित्रकूट में 26 एवं 27 फरवरी को होगी राष्ट्रीय संगोष्ठी

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चित्रकूट। चित्रकूट / मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिले वनों एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होते हुए भी प्रत्येक वर्ष जनवरी से बर्षा के पूर्व तक पेयजल संकट से प्रभावित रहते हैं। इस समस्या से सतना एवं चित्रकूट जिला भी परे नहीं हैं। पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद जिले के अधिकतर भाग अथवा क्षेत्रों में जल स्तर सामान्य से काफी नीचे है, जो निरंतर कि खिसकता जा रहा है। वर्षभर पेयजल की आपूर्ति और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके इस मकसद से दीनदयाल शोध संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा जल प्रबंधन के माध्यम से व पुरानी जल संरचनाओं को दुरुस्त करके समाज के सहयोग से एवं उपयोगकर्ता दलों की निगरानी के कारण सभी संरचना जीवंत बनी हुई है।राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में का नारा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल ग्रहण का कार्य शुरू किया था, जिसका परिणाम यह रहा कि आज चित्रकूट क्षेत्र के वह गांव जो कल तक पानी के लिए तरसा करते थे वहां आज पानी के काफी कुछ प्रबंध हो गए हैं।

इसी तरह नानाजी ने हमेशा ग्रामीणों को समग्र रूप से पोषण प्रदान करने पर जोर दिया। चूंकि भारत में अधिकांश किसान सीमांत किसान है इसलिए नानाजी ने उनके लिए ड़ेड एकड़ और ढाई एकड़ की खेती के मॉडल विकसित किए जिससे वह अपने भोजन और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। इसके अलावा कृषि से वह अपने परिवार और सामाजिक जरूरतों के लिए भी कुछ बचा सकें।

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने बताया कि दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा विगत 2 वर्षों से भारतीय संस्कृति में जल एवं पोषण की संस्कृति को संजोने का काम हो रहा है इसलिए ऐसे दोनों महत्वपूर्ण विषय पानी एवं पोषण पर 26 एवं 27 फरवरी को दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन उद्यमिता विद्यापीठ, दीनदयाल परिसर चित्रकूट में किया जा रहा है।

भारतरत्न नानाजी की 10 वीं पुण्यतिथि होने के कारण इस संगोष्ठी में 10 विश्वविद्यालयों एवं 10 सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी देने वाली है जिसमें महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, ए के एस विश्वविद्यालय सतना, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय लखनऊ, डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के अलावा सामाजिक संस्थाओं में अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान, सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट, वीरांगना दुर्गावती ग्रामीण विकास शोध समिति, मानवीय शिक्षा संस्थान बांदा, सर्वोदय सेवा संस्थान, अटारी कानपुर, अटारी जबलपुर, श्री कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार, जल ग्राम जखनी आदि संस्थाओं की भागीदारी रहेगी।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में जल प्रबंधन की भारतीय परंपराएं, जल प्रबंधन की आवश्यकता, स्वस्थ जीवन के लिए पोषकीय आहार, स्थानीय उपलब्ध अनाजों का पोषण में महत्व, आजीविका संवर्धन आदि विषयों पर विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन किया जाएगा।

संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर 26 फरवरी को प्रखर विचारक-चिंतक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी एवं संघ के वरिष्ठ प्रचारक मदन दास देवी जी, दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेंद्रजीत सिंह, प्रधान सचिव अतुल जैन तथा राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, सांसद देवास महेंद्र सोलंकी, उज्जैन विधायक डॉ मोहन यादव, मऊ विधायक उषा ठाकुर, चंद्रशेखर साहू पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़, राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, बांदा सांसद आर.के. पटेल, मानिकपुर विधायक आनंद शुक्ला प्रमुख रूप से रहने वाले हैं।

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