पावन सरयू को लील गये होटल रेस्टोरेंट

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-चित्रकूट के गुनहगार-एक
– श्रीराम जी के लिए चित्रकूट में अवतरित हुई थीं सरयू की धारा
– कामदगिरि के चौथे मुखारबिंद से निकलकर राघव प्रयाग घाट में पयस्वनी के साथ मिलकर मंदाकिनी में मिलती है सरयू नदी
– प्रशासन ने पकड़ाई नोटिस तो इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिला स्टे

गर्मी अपने पूरे शबाब पर है। पारा 50 के आसपास जाकर ठहर रहा है। ऐसे में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा है। लेकिन वहीं धर्मनगरी चित्रकूट में नदियों को मारने का काम वर्षों से कुछ धनपशु कर रहे हैं। चित्रकूट के गुनहगार की पहली किस्त में जानिये कि कौन है चित्रकूट के असली गुनहगार जो अपनी मोटी खाल की बदौलत चित्रकूट के न केवल पर्यावरण का नुकसान कर रहे हैं बल्कि खुद ही यहाां की जीवन रेखाओं को मारने का काम कर रहे हैं। 

 पयस्वनी नदी के कातिलों को ‘क्लीन चिट‘
ब्रहमपुराण के अनुसार सृष्टि का आरंभ करने के लिए परमपिता ब्रहमा जी ने चित्रकूटधाम पर तप किया। इस तप में उपयोग के लिए जल की आवश्यकता होने के पहले ही उन्होंने अपने कमंडल से श्री हरि विष्णु के पादप्रछालन किया। इससे गिरे जल से ब्रहमकुंड निर्मित हुआ और पयस्वनी नदी का अवतरण हुआ। यह नदी श्री कामदगिरि के दक्षिण भाग से निकलकर उत्तर की ओर चलकर राघव प्रयाग घाट के पहले आकर मंदाकिनी नदी मे सरयू के साथ मिलती है।

पयस्वनी नदी का पूरा भाग मध्य प्रदेश में पड़ता है। नदी के भाग पर बड़ी संस्थाओं के साथ ही मठ मंदिरोें और होटल लाजों ने काफी समय से कब्जा कर रखा है। उनके कब्जे को हटाने के लिए कुछ साल पहले एसडीएम एसपी त्रिपाठी ने चिंहाकन कर 35 लोगों को नोटिस पकड़ाई साथ ही एनजीटी के अधिकारियों ने भी अपने तेवर दिखाये। तो सभी लोग नेतागिरि में उतर गये। एनजीटी के अधिकारियों नेे तो अपना हिस्सा लेकर किस्से को बंद कर दिया, लेकिन एसडीएम की नोटिस को लेकर अतिक्रमणकारी हाईकोर्ट निकल गये और वहां से स्टे लाककर अपने अपने होटलों में दो दो मंजिलें और बनवा लीं। अब हाल यह है कि अभी पिछले दिनोें ही एक और शानदार होटल नदी की जमीन पर बना हुआ है।

सरयू नदी पर डटे हैं 11 अवैध कब्जेदार श्री कामदगिरि परिक्रमा के चतुर्थ मुखार बिंद के थोडा पहले सरयूधारा नामक स्थान पड़ता है। इसके बारे में संत तुलसीदास जी ने लिखा है, एकक निमिष सरयू बसै, तुलय न तुलसीदास। यानि एक क्षण यहां पर रूककर राम के नाम का जाप करने पर पापों का नाश होता है। कहा जाता है कि सरयू गंगा प्रभु श्री राम के स्नान के लिए चित्रकूट में अवतरित हुई थी। भगवती सरयू आगे सरयू कुंड का निर्माण कर यूूपी एमपी बार्डर से होते हुये रामघाट में जाकर पयस्वनी गंगा के साथ मंदाकिनी में मिलकर त्रिवेणी का निर्माण करती हैं। इसी स्थान पर भगवान राम के द्वारा अपने पिता महराज दशरथ के पिंडतर्पण का उल्लेख भी मिलता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकारी तौर पर सरयू नदी पर लगभग 11 लोगों ने कब्जा कर रखा है। प्रशासन की नोटिस मिलने के बाद यह सभी हाईकोर्ट पहुंचे और वहां सेे स्टे लेकर आ गये।

हैरत की बात यह है कि यूपी  फिर एमपी दोनोें ही स्थानों पर चित्रकूट की जीवन रेखाओं पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सरकारी अधिकारी की तो बात छोडिये कोर्ट भी ढीला ढाला रवैया अपनाती है। एनजीटी के अधिकारी एमपी में जबलपुर और यूपी में बांदा में बैठते हैं। इनका हाल यह है कि यह होटल व लॉज वालों को नोटिस पकड़ाकर खाली अपना मामला सेट करते हैं। वरिष्ठ समाजसेवी सरस्वती जी कहती है कि जल्द ही हम लोग चित्रकूट की जीवन रेखाओं के लिए संधर्ष करेंगे। रामघाट से इसका बिगुल बजाया जाएगा। कब्जाधारक हर होटल व लॉज के साथ मठ मंदिर में जाकर अपना विरोध प्रर्दशन किया जाएगा।

रिपोर्ट- संदीप रिछारिया

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