पोषण एवं जल संस्कृति को लेकर चित्रकूट में हुआ राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

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देशज परंपरा का आधुनिक ज्ञान के साथ समन्वय हेतु चिंतन जरूरी- सुरेश सोनी जी

चित्रकूट । भारत में हमारी जो जीवन शैली विकसित हुई है उसमें सिर्फ अपना विचार नहीं था उसमें सब समाहित था। संपूर्ण जीवन का जो आधार है वह जल है और जल से ही जीवन है, उसके लिए जल की शुद्धता और उसका संरक्षण जरूरी है, वैसे ही पोषण संस्कृति की जो बात है उसके लिए भूमि की शुद्धता और भूमि का संरक्षण भी जरूरी है साथ ही पोषण के जो विविध आहार हैं उसकी शुद्धता पर विचार करने की जरूरत है। उपरोक्त बातें भारतरत्न नानाजी देशमुख की 10 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित पोषण एवं जल संस्कृति की राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी ने कहीं।

दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा पोषण एवं जल संस्कृति पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी, वरिष्ठ प्रचारक एवं दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक मदन दास जी, अध्यक्ष वीरेंद्रजीत सिंह, प्रधान सचिव अतुल जैन तथा राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, देवास सांसद महेंद्र सोलंकी, विधायक उज्जैन डॉक्टर मोहन यादव, ट्राईफेड के महानिदेशक प्रवीण कृष्ण जी द्वारा भारतरत्न नानाजी देशमुख के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी की भूमिका रखते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन ने बताया कि दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा विगत 3 वर्षों से भारतीय संस्कृति में पोषण एवं जल की संस्कृति को संजोने का काम हो रहा है, जिसके आधार पर देश में परंपरागत तरीकों से मिलने वाले पोषण आहार की तरफ लोगों को ले जाने की जरूरत को महसूस किया गया और संस्थान द्वारा इसकी देशव्यापी पहल की गई है। पोषक तत्वों की जरूरत और आपूर्ति को लेकर व्यापक कार्य योजना बनाकर काम शुरू कर दिया गया है। श्री जैन ने बताया कि व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर संस्थान ने स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले अनाज, फल, सब्जी की उपयोगिता को सामने लाने का बीड़ा उठाया है। संस्थान ने भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ-ट्राइफेड के माध्यम से वनवासियों की भौगोलिक दृष्टि से जो संपदा है उस भौतिक संपदा के त्रृण को उतारने का प्रयास किया है। ट्राईफेड के माध्यम से आदिवासी उद्यम को निजी क्षेत्र के उद्यम से जोड़ने की योजना है।

संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी ने अपने मुख्य आतिथ्य उद्बोधन में भारतरत्न नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भौतिक रूप से श्रद्धेय नानाजी हमारे बीच में नहीं है लेकिन उनके विचार व भाव हमारे बीच हैं उन्हीं विचारों-भावों को साकार करने के लिए विविध प्रकल्पों के माध्यम से उनके विचारों को व्यावहारिक रूप दिया जा रहा है उस दृष्टि से ही उनकी 10वीं पुण्यतिथि पर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन है, जिसमें हमारी देशज परंपरा एवं आधुनिक ज्ञान का समन्वय कैसे हो यह परिणाम इस सेमिनार के चिंतन में आना चाहिए।

श्री सोनी ने कहा कि पोषण का जो विविध आहार है उसकी शुद्धता पर विचार करने की जरूरत है, पहले के समय में हर घर का डॉक्टर हमारा भोजन था, हमारी देशज भोजन बनाने की जो विधि थी जिससे भारतीय लोग ऊर्जावान और निरोगी रहे हैं उसका चिंतन करने की जरूरत है।

इस अवसर पर ट्राइफेड के महानिदेशक प्रवीण कृष्ण जी ने कहा कि वनवासी बंधुओं की जो भौगोलिक संपदा है उसे विपणन विकास द्वारा देश में जनजाति लोगों का सामाजिक आर्थिक विकास करना है। ट्राईफेड जनजातियों को अपने उत्पाद बेचने मैं एक समन्वयक और सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करेगा, जिसमें जनजाति लोगों को जानकारी, उपकरण और सूचनाओं से सशक्त करना है ताकि वे अपने कार्यों को अधिक क्रमबद्व और वैज्ञानिक तरीके से कर सकें। प्रधानमंत्री वन धन योजना के अंतर्गत ट्राइफेड के द्वारा अतिरिक्त मूल्य के माध्यम से आदिवासी उद्यमों को बढ़ावा देना एवं वनोपज की ब्रांडिंग और मार्केटिंग का उत्पादन करना है।

इस अवसर पर 10 विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं 10 सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख व्यक्तियों की भागीदारी भी इस सेमिनार में रही।जिसमें महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय से कुलपति प्रो. एन.सी. गौतम, ए.के.एस. विश्वविद्यालय सतना के चेयरमैन इंजी. अनन्त कुमार सोनी, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से डा.सुधीर कुमार उपाध्याय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से कुलपति डा.यू.एस.गौतम, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय लखनऊ से प्रो.एस.जी.शुक्ला, डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर से प्रो.राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट से कुलपति डा. योगेष चन्द्र दुबे, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक से प्रो. प्रकाषमणि त्रिपाठी तथा राजीव गांधी प्रोघोगिकी विष्वविघालय भोपाल के निदेषक डा.मुकेष पाण्डेय के अलावा सामाजिक संस्थाओं में अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान से गोपाल भाईजी, सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट से डा.ए.एस.राजपूत, श्री कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार से महन्त मदन गोपाल दासजी महाराज, श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट से अनिल कुमार, वीरांगना दुर्गावती ग्रामीण विकास शोध समिति से सीताराम विष्वकर्मा, मानवीय शिक्षा संस्थान बांदा प्रेम सिंह, सर्वोदय सेवा संस्थान अभिमन्यु सिंह, अटारी कानपुर से डा. साधना सिंह, अटारी जबलपुर से निदेषक डा.अनुपम मिश्र, जल ग्राम जखनी से उमाषंकर पाण्डेय एवं सेवा यू.के. से धीरूभाई शाह आदि संस्थाओं से प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में दो दिन तक जल प्रबंधन की भारतीय परंपराएं, जल प्रबंधन की आवश्यकता, स्वस्थ जीवन के लिए पोषकीय आहार, स्थानीय उपलब्ध अनाजों का पोषण में महत्व, आजीविका संवर्धन आदि विषयों पर विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा चिंतन किया जाएगा।

संदीप रिछारिया

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