युवा किसानो ने सीखा मृदा परिक्षण का हुनर

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 कौशांबी | रासायनिक खादों के प्रयोग के कारण लगातार मिटटी की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है | किसानो को इस स्थिति से उबारने के लिए शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र ने एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया । कृषि विज्ञान केंद्र ने वैज्ञानिको ने युवा किसानों के कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण दिया। इस दौरान उनको रासायनिक खादों से होने वाले नुकसान और खेत की मिट्टी की जांच के लिए जमा करने का तरीका बताया।

कृषि विभाग की प्रयोगशाला में युवा किसानों व्यावहारिक ज्ञान देते हुए मृदा वैज्ञानिक डा. मनोज सिंह ने बताया कि आज खेती में सब से बड़ी जरूरत है कि जो हम पैदा कर रहे हैं, वह गणवत्ता पूर्ण रहे। इसके लिए जरूरी है कि हम सब से पहले रासायनिक खादों को प्रयोग फसल पर करना बंद किया जाए। उन्होंने युवा किसानों को जैविक खाद के प्रयोग के लाभ बताते हुए उनको इसके बनाने का तरीका बताया। कहा कि इस खाद के प्रयोग से मिट्टी में जीवांश कार्बन, पी.एच, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की मात्रा बनी रहती है। इसके बाद उन्होंने किसानों को खेत की मिट्टी के नमूने लेने के तरीके बताया। कहा कि खेत के चारों कोनो के साथ ही मध्य में करीब छह इंच का वी आकार का गड्ढा बनाते हुए मिट्टी निकाली जाए। इसे सुखाने के बाद कूटकर तिनके आदि अलग करते हुए जांच के लिए प्रयोगशाला लाए। प्रयोगशाला के अध्यक्ष राजेंद्र मौर्या ने प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की जांच और डबल ए एस मशीन से सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच की तकनीक बताई। प्रशिक्षण में युवा किसान केपी मौर्या, अमनराज, अमित, मुकेश जायसवाल, जितेंद्र, लवलेश समेत 20 युवा किसान शामिल हुए।
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