राज्यपाल टंडन ने सियाराम कुटीर पहुंचकर नानाजी को दी श्रद्धांजलि

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नानाजी के कार्यों को नजदीकी से देखने के मिले कई अवसर – टंडन

चित्रकूट । नानाजी अक्सर कहा करते थे जिस दिन गांव जाग जाएंगे, उस दिन दुनिया जाग जाएगी। वह ऐसा अपने राजनीतिक अनुभव, सामाजिक दृष्टिकोण से कहा करते थे। उन्होंने कहा ही नहीं करके भी दिखाया। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद से शुरू की गई उनकी सामाजिक यात्रा में समाज मूलक कार्यों को नजदीकी से देखने का अवसर मुझे कई बार मिला है। भारतरत्न नानाजी अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन विचार के रूप में वह आज भी हमारे बीच मौजूद हैं।
यह अवसर था भारत रत्न नानाजी देशमुख के चित्रकूट स्थित आवास सियाराम कुटीर का, जहां मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन उनको श्रद्धांजलि देने पहुंचे और उनके साथ बिताए पलों को याद करके भाव विभोर हो उठे।

आरोग्यधाम के हेलीपैड से सीधे महामहिम मंदाकिनी कॉटेज पहुंचे जहां दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक व वरिष्ठ प्रचारक माननीय मदन दास देवी से मुलाकात की और उनके साथ अल्पाहार लिए। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन भी साथ रहे।

उसके बाद महामहिम लालजी टंडन भारत रत्न नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि देने सियाराम कुटीर पहुंचे, वहां नानाजी के कक्ष में पहुंचकर उनको श्रद्धा पुष्प अर्पित किए। और कुछ देर नानाजी के कक्ष में ही बैठकर संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन के साथ नानाजी के साथ बिताए पलों को याद करते हुए अपनी चिर-स्मृतियां साझा किए।

महामहिम टंडन ने बताया कि जब वे बिहार में राज्यपाल थे तब उन्होंने वहां राजभवन में भी नानाजी का बड़ा चित्र तैयार करके लगाया था। नानाजी का कार्य यज्ञ की तरह है, उनको देखकर एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी जब गोंडा आए थे तब उस समय वे भी गोंडा में नानाजी के कार्यों के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं। इसके अलावा भी जब आरोग्यधाम का निर्माण कार्य चल रहा था उस समय पर भी मैं चित्रकूट आया था और नानाजी के स्वाबलंबन कार्यों को बहुत नजदीक से देखने का अवसर कई बार मिला है। नानाजी का व्यक्तित्व बहुत विराट रहा है, उनसे जितनी बार भी मिलो, हर बार एक नया अनुभव होता है।

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