हम हिंदुस्तानी: पांच बजते ही बजने लगे शंख और थालियां

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संदीप रिछारिया ( वरिष्ठ संपादक)

छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी नए दौर में लिखेगे हम मिलकर नई कहानी, कुछ याद आया नही,चलो याद दिलाते है। यह गाना पंडित जवाहर लाल नेहरू के आर्थिक उदारीकरण को बढ़ावा देने लिए लिख गया था। देश मे आर्थिक उदारीकरण भी खूब हुआ,लेकिन आज इस गाने की याद फिर इस लिए आई क्योकि अब हम 19 वी नही बल्कि 21 वी सदी में है और यह गीत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मोजू दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कोरोना की चेन तोड़ने के लिए जनता कर्फ्यू के साथ विशेष विशिष्ट सेवाएं देने वालो लोगों को शाम 5 बजे धन्यवाद बतौर घण्टी,थाली आदि बजाने का आह्वान किया था। आज पूरे देश के साथ धर्मनगरी चित्रकूट के निवासियों ने यह दिखा दिया कि वह उसी न्यू इंडिया के निवासी है,जिसको आगे बढ़ाने का काम मोदी कर रहे है।

प्रधानमंत्री के आह्वान पर शाम 5 बजते ही धर्मनगरी में एक और जहाँ मन्दिरो में घण्टा, घड़ियाल आदि बजने लगे,वही घरों के अंदर,खिड़कियी व छतों पर लोगो ने शख,थाली,घण्टी आदि बजाकर कोरोना को लात मारने का काम किया।

शंख एवं घंटा के नाद का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व -अभय महाजन

भारत रत्न नानाजी देशमुख के आवास सियाराम कुटीर चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता एवं वहां रह गए कार्यकर्ताओं के परिवारों ने वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ रहे लोगों को संबल प्रदान करने तथा सहयोग करने वाले लोगों का अभिनंदन करते हुए शंख, थाली, घंटा तथा ताली बजाकर कोरोना सेनानियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव श्री अभय महाजन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 मार्च को घोषित जनता कर्फ्यू कोरोना वायरस के विरुद्ध एक अत्यंत ही सूझबूझ भरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कदम है।

एक सजग राष्ट्र प्रहरी के नाते देश के हरेक नागरिक को वैश्विक महामारी से निपटने में अपना-अपना योगदान देने की नितांत आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि मा. प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर 5 मिनट तक शंख, घंटा, थाली या ताली बजाना एक आध्यात्मिक प्रयोग है, जिसके माध्यम से प्राणाकर्षण करके कोरोना से लड़ने वालों को सशक्त व संबल प्रदान करना है।

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