होली खेलने के साथ इस तथ्य को भी जानिए

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संदीप रिछारिया (सीनियर एडिटर)

व्यक्ति का हर कार्य उसकी इच्छा के अनुसार ही चलता है। वह धन,सम्पत्ति, यश,वैभव , सन्तानसुख आदि के लिए ईश्वर के दरवाजे पर जाकर माँगता है। अगर उसकी उसकी इच्छा के विपरीत कोई भी कार्य के विपरीत कुछ हुआ तो फिर वह घोर नास्तिक होने का ड्रामा कर भगवान को कोसने लगता है। लेकिन कलयुग में भी ऐसे रहस्यपूर्ण तथ्य सामने आते है,जो यह सुनिश्चित कर देते है कि भगवान आज भी है।
ऐसा ही एक उदाहरण मध्यप्रदेश के देवास जिले के हाटपिपलिया गाँव से आया है। इस गाँव मे सदियों पुराना भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह भगवान का मंदिर है। जहाँ पर जलझिलणी एकादशी पर हर वर्ष नरसिंह की पहाड़ी पत्थर से बनी हुई पाषाण प्रतिमा स्थानिय भमोरी नदी स्नान के लिए ले जाते हैं।पंडित पूजा करने के बाद पानी में साढ़े सात किलो की पाषाण प्रतिमा को नदी में बहा देते हैं परंतु प्रतिमा बिना डूबे हुए बहते पानी के विरुद्ध दिशा में सीधी पंडितजी के पास आती है। यह दृश्य देखने के लिए देश भर से हजारों की संख्या में सनातनी आते हैं।
अब इस दृश्य को देखकर वहाँ मौजूद हर व्यक्ति आस्था के अतिरेक में डूब कर ॐ नारायणाय नमः, या जय श्री विष्णु के नारे लगाने लगते है।

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