नहीं रहे प्रतापगढ़ हिंदी साहित्य महारथी भानु प्रताप त्रिपाठी एडवोकेट मराल जी

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जय श्रीमन्नारायण
अत्यंत दुखद
प्रतापगढ़ हिंदी साहित्य महारथी भानु प्रताप त्रिपाठी एडवोकेट मराल जी का आज प्रातः काल 8:00 बजे 81 वर्ष की आयु में उनके निज निवास बस अड्डे के पास परम पद हो गया।

आप का जन्म लालगंज तहसील के भोजपुर पूरे सेवक राम ग्राम में पंडित देवी प्रसाद तिवारी एवं माता श्रीमती इंद्र पाली देवी के घर 10 नवंबर 1940 को हुआ था ।

आपकी अनेकों रचनाएं हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है, किंतु आपकी अनुपम कृति “देश हमारा धरती अपनी” स्वतंत्रता संग्राम का काव्यात्मक इतिहास 1830 से लेकर 1947 तक का अनुपम ग्रंथ है।

दास के ऊपर आप की विशेष कृपा रहती थी। ठाकुर जी से दास की प्रार्थना है कि अपने श्री चरणों में आपको गोलोक धाम में स्थान प्रदान करें। शत शत नमन विनम्र श्रद्धांजलि। दास ने एक बार आपके आवास पर आपके जन्म दिवस पर सम्मानित किया था यह चित्र उसी समय का है।

धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

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