21 दिन बाद फिर क्यों बढ़ जाएगी लॉक डाउन की सीमा

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कोरोना वायरस की चपेट में भारत ही नही पूरा विश्व है। अब जबकि इससे निपटने का कोई तरीका विज्ञान खोज नही पाया है तो सोशल डिस्टेंस के माध्यम से इसके प्रसार को कम करने की कोशिश ही विकल्प के रूप में अपनाई जा रही है। ऐसे में इस डिस्टेंस को मेंटेन करने के लिए सरकार द्वारा किये गए लॉक डाउन का पूर्णतया पालन न हो पाने से रोजाना स्थिति भयावह होती जा रही है। अगर 21 दिन में इसके ज्ञात केसों में कमी नही आती है तो सरकार लॉक डाउन की समय सीमा बढ़ा सकती है।इसको यूं भी समझ सकते है कि सरकार ने इससे निपटने के लिए गरीबो और किसानों के किये 3 महीने का प्लान तैयार किया है।

भारत सरकार द्वारा किये गए लॉक डाउन और कोरोना संक्रमण के प्रसार से बचाव के किये उठाये गए कदम की WHO तारीफ कर चुका है। लेकिन साथ ही चिंता भी जताई है कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश मे जहां 80 प्रतिशत लोग प्लान कर के जिंदगी नही जी पाते वहां इसको रोक ने में आने वाली कठिनाई के बारे में ठोस कदम उठाने पड़ेंगे। सरकार ने 21 दिन का लॉक डाउन कर के लोगो से अपील की है कि अपने घरों में रहें और सामान्यतया मेलजोल बन्द कर दें किंतु रोजमर्रा की जरूरतो के चलते और परदेश में फंसे लोगों के लिए ये कर पाना थोड़ा मुश्किल भरा है।

सरकार के विश्वसनीय सूत्रों की माने तो वायरस से लड़ने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की गई है किंतु यदि हालात सुधरते नही है तो लॉक डाउन की समय सीमा विस्तार किया जा सकता है। पूरे विश्व मे अकेले यूरोप में 3 लाख से ज्यादा संक्रमित लोग सामने आए हैं यही नही स्पेन और इटली में हुई कुल मौतें पूरे विश्व की आधी हैं। इसलिए सरकार किसी भी तरह की चूक करने के पक्ष में नही है। दूसरे देशों से हुई कमियों को दूर कर अपने रास्ते खोजने के पक्ष में दिख रही सरकार का लॉक डाउन फिलहाल जनता मानने को तैयार नही है। रोजाना तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। बावजूद इसके लोग सड़कों पर उतरने को आतुर है।

लॉक डाउन होने के तीसरे दिन चौबीस घण्टे में तकरीबन डेढ़ सौ संक्रमण के केस सामने आए हैं। और अब तक 20 लोगो की मौत हो चुकी है। जो इसकी भयावहता को दर्शाता है। आज भारत के पास पर्याप्त मात्रा में टेस्ट किट्स और संसाधन मौजूद है किंतु यदि लोगो ने यदि सोशल डिस्टेंस का पालन नही किया तो उन्हें आने वाले समय मे कुछ और दिन के लिए घरों में कैद होना पड़ सकता है।

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