भागवत भगवान का ही स्वरूप तथा कथा श्रवण से होता है भक्ति का उदय – दिनेशाचार्य जी

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अयोध्या। भागवत केवल पोथी मात्र नहीं यह भगवान का ही स्वरूप है, भक्तों का तो परमधन है। भागवत सुनना, मतलब भगवान को सुनना।

जन्मांतर के पुण्यों के उदय का फल है-भागवत श्रवण। बीकापुर क्षेत्र के खौंपुर-कोदैला में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का प्रथम पुष्प विसर्जित करते हुए कथाव्यास महंत दिनेशाचार्य जी महाराज ने बताया कि हम सब भूतकाल के शोक, वर्तमान के मोह और भविष्य के भय से ग्रसित हैं।

इससे पीछा छुड़ाने वाली शक्ति का नाम है -भक्ति। यह कहीं दुकान पर खरीदने से नहीं मिलेगी। यह तो हमारे भीतर ही है बस वह सुप्त है,वह जागृत होगी भगवान की कथा के श्रवण से।भागवत की कथा श्रवण करने से भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति उत्पन्न होती है, जिसके चलते व्यक्ति शोक की जगह आनंद, मोह की जगह सुख और भय की जगह शांति प्राप्त करता है। श्रीमद्भागवत “शोक मोह भयापहा” है।

भागवत जी का दर्शन, पठन व श्रवण से पापों का शमन होता है। इसको श्रवण करने की इच्छा करने मात्र से भगवान ह्रदय में विराजमान हो जाते हैं। अति हरि कृपा जाहि पर होई। पांव देई यह मारग सोई॥सत्संग केवल पुरुषार्थ से नहीं मिलता अपितु भगवत्कृपा से ही संभव होता है। जिन्हें जनता इलेक्ट करती है, वो संसदभवन, विधानसभा में जाते हैं और जिन्हें जगदीश सिलेक्ट करते हैं, वो सत्संग में जाते हैं।

इस अवसर पर मुख्य यजमान उमाशंकर तिवारी विजय शंकर, कृष्ण कुमार,राम नारायण तिवारी एडवोकेट,बृजभूषण,चंद्र भूषण कृष्णानंद दुबे आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • मनोज तिवारी 
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