सतना जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने हाइड्रोसील की जगह गरीब आदिवासी युवक के पेट को फाड़कर कर दिया आपरेशन

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चित्रकूट – कहते हैं कि समाज में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है,लेकिन जब डॉक्टर रूपी भगवान ही हैवान बन जाए, तब फिर कौन बचाने आएगा। कोरोना महामारी के समय देश और दुनिया भर के डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इंसानियत और मानवता की भलाई के लिए अस्पतालों में मरीजों को बचाने के लिए दिन रात एक कर दिया। लेकिन इसी पेशे में कुछ ऐसे भी लोग हैं,जो इसे बदनाम कर रहे हैं।
कुछ ऐसा ही मामला चित्रकूट में आरोग्यधाम के पीछे स्थित नई बस्ती से भी सामने आया है। बस्ती निवासी बेहद गरीब आदिवासी युवक चुनवाद बीती 29 तारीख को सतना के सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में हाइड्रोसील का इलाज करवाने के लिए गया था। जहां अस्पताल में डाक्टरों ने चुनवाद को भर्ती करते हुए हाइड्रोसील की जगह पेट की चिड़फाड करते हुए पेट का आपरेशन कर दिया। और 3 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी कर घर वापस भेज दिया। घर वापस आने के बाद गरीब चुनवाद आदिवासी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आपरेशन के घाव में कीड़े पड़ गए।और दर्द से तड़पते गरीब ने बिस्तर पकड़कर मौत का इंतजार करना शुरु कर दिया।सतना जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही और हैवानियत के चलते गरीब का पूरा परिवार अब बिखरने की कगार पर है।

सतना से विनोद शर्मा की रिपोर्ट।

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