धर्मनगरी चित्रकूट में वरिष्ठ पत्रकार विनोद तिवारी को मिला ‘कामदगिरि सम्मान’

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चार दशकों की निष्पक्ष पत्रकारिता को नमन

चित्रकूट-धर्मनगरी चित्रकूट के गोलोक धाम, हनुमानधारा बाईपास स्थित परिसर में दैनिक नवभारत, सतना के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री विनोद तिवारी को पत्रकारिता के 40 वर्ष पूर्ण होने पर ‘कामदगिरि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें सत्य, साहस और समाजहित के लिए समर्पित पत्रकारिता के लिए प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि श्री तिवारी की लेखनी सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सच और संवेदना के पक्ष में खड़ी रही है। उन्होंने पत्रकारिता को आजीविका नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व और जनसेवा का माध्यम बनाया।
आयुर्वेद विशेषज्ञ पंडित दयाशंकर गंगेले ने कहा,
“जैसे आयुर्वेद शरीर को रोग से मुक्त करता है, वैसे ही विनोद तिवारी जी की पत्रकारिता समाज को अन्याय से मुक्त करने का कार्य करती है। उनका जीवन अनुशासन, सेवा और सत्य का उदाहरण है।”
वरिष्ठ पत्रकार संदीप रिछारिया ने कहा,
“चार दशक तक मूल्यों के साथ पत्रकारिता करना सबसे बड़ी साधना है। विनोद तिवारी जी ने कभी समझौता नहीं किया, इसलिए उनका सम्मान पूरे पत्रकार समाज का सम्मान बन गया है।”
तीर्थ पुरोहित पंडित मनोज तिवारी ने कहा,
“धर्मनगरी चित्रकूट में ऐसे कर्मयोगी पत्रकार का सम्मान होना इस बात का संकेत है कि समाज आज भी सत्य और संस्कार को पहचानता है। यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा।”
वरिष्ठ पत्रकार राकेश शर्मा ने कहा,
“विनोद तिवारी जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी निर्भीकता और संतुलन है। उन्होंने न तो दबाव में कलम झुकाई और न ही लोकप्रियता के लिए सिद्धांत छोड़े।”
इस अवसर पर तीर्थ पुरोहित पंडित मनोज तिवारी, आयुर्वेद विशेषज्ञ पंडित दयाशंकर गंगेले, वरिष्ठ समाजसेवी अश्विनी यादव, वरिष्ठ पत्रकार राकेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार संदीप रिछारिया, पंडित घनश्याम आचार्य, रविकरण तिवारी, राम बहोरी अतरौलिया एवं व्यापारी गणेश केसरवानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक चिंतक, कवि एवं साहित्यकार स्व. द्वारिकेश पटेरिया सहित अन्य प्रतिष्ठित विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनकी पुण्यतिथि को स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
समारोह का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि पत्रकारिता की गरिमा, सामाजिक सरोकार और धर्मनगरी चित्रकूट की सांस्कृतिक चेतना को निरंतर सहेजा जाएगा।

संदीप रीछारिया रिपोर्ट

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