डॉ. मनीष सक्सेना ने RPA पदाधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप, प्राचार्य कक्ष पर कब्जे से लेकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर तक के दावे
रायबरेली। रतापुर स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (FGIPS) में प्राचार्य पद को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। संस्थान के प्राचार्य डॉ. मनीष सक्सेना ने रायबरेली पॉलिटेक्निक एसोसिएशन (RPA) से जुड़े पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण में जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। आरोपों ने संस्थान की कार्यप्रणाली और प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉ. मनीष सक्सेना के अनुसार वह 23 अप्रैल 2025 से FGIPS में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं। उनका दावा है कि 15 अप्रैल 2025 को हुई RPA की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर उन्हें संस्थान के प्राचार्य का कार्यभार दोबारा सौंपा गया था। इसके बावजूद अब उनके पद और अधिकारों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया गया है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
शिकायत में डॉ. सक्सेना ने RPA के सचिव पर आरोप लगाया है कि संस्थान में कुछ व्यक्तियों को कार्यभार सौंपने में निर्धारित नियम-कायदों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि न्यूनतम शैक्षिक योग्यता, प्रबंध समिति की संस्तुति, विज्ञापन और साक्षात्कार जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
8 अगस्त के कथित आदेश से बढ़ा विवाद
विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब शिकायतकर्ता के मुताबिक 8 अगस्त 2026 को एक कथित आदेश जारी कर उन्हें प्राचार्य पद और दायित्वों से मुक्त करने तथा डॉ. पियूष को प्राचार्य का दायित्व सौंपने का निर्देश दिया गया। डॉ. सक्सेना का आरोप है कि उक्त आदेश में संस्थान के लेटरहेड और पत्रांक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। इसी आधार पर उन्होंने आदेश की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्राचार्य कक्ष का ताला तोड़ने का आरोप
डॉ. सक्सेना के आरोपों के मुताबिक इसके बाद डॉ. पियूष ने प्राचार्य कक्ष का ताला तोड़कर वहां कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, संस्थान के आधिकारिक WhatsApp समूह से वर्तमान प्राचार्य को हटाने और संस्थान से संबंधित दस्तावेजों एवं आदेशों पर हस्ताक्षर किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि डॉ. पियूष ने सुरक्षा गार्ड को कथित दस्तावेज दिखाकर उन्हें संस्थान परिसर में प्रवेश न देने के निर्देश दिए। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला महज प्राचार्य पद के विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और दस्तावेजी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
जांच से ही सामने आएगा सच
डॉ. मनीष सक्सेना ने पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल प्राचार्य पद को लेकर आमने-सामने आए दावों के बीच संस्थान में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित प्रबंधन और सक्षम अधिकारी इन आरोपों की जांच कब और किस स्तर पर कराते हैं।
हालांकि, खबर में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता डॉ. मनीष सक्सेना के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अनुज मौर्य रिपोर्ट


