रायबरेली -दो दिन में कार्रवाई के आश्वासन के बाद डीएम से मिले मजदूर, बोले- रोज कमाकर खाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट
रायबरेली। एफसीआई गोदाम में काम करने वाले पल्लेदार और मजदूरों ने काम से बाहर किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। मजदूरों का कहना है कि बिना किसी सूचना या नोटिस के उन्हें गोदाम के अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। काम बंद होने से करीब 200 मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से एफसीआई गोदाम में पल्लेदारी और अन्य मजदूरी का काम करते आ रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार बदलने के बाद उन्हें काम पर नहीं आने दिया जा रहा है। उनका कहना है कि 29 तारीख से काम बंद है और वे लगातार गोदाम पहुंच रहे हैं, लेकिन गेट पर ही रोक दिया जाता है।
मजदूर प्रकाश गुप्ता ने बताया कि वह पिछले दो साल से ठेके पर काम कर रहे हैं, जबकि इससे पहले भी करीब आठ साल तक इसी जगह काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले महीने में 10 से 15 हजार रुपये तक कमा लेते थे, लेकिन अब महज 4 से 5 हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं। इतनी कम आमदनी में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल है।
वहीं मजदूर विनोद कुमार ने बताया कि वह रोजाना करीब 10 बजे ड्यूटी के लिए आते हैं और पल्लेदारी का काम करते हैं। प्रति बोरी के हिसाब से मजदूरी मिलती है और दिनभर मेहनत करने के बाद करीब 200 से 250 रुपये की आमदनी होती है। इसी कमाई से घर का खर्च चलता है।
विनोद कुमार का आरोप है कि मजदूरों को न तो कोई लिखित सूचना दी गई और न ही गेट पर कोई नोटिस लगाया गया कि आखिर काम क्यों बंद है। उन्होंने कहा कि अंदर से और ठेकेदार की ओर से करीब छह महीने तक काम बंद रहने की बात बताई जा रही है। मजदूरों का सवाल है कि अगर छह महीने तक काम नहीं मिलेगा तो उनके परिवारों का भरण-पोषण कैसे होगा।
मजदूरों ने अपनी समस्या को लेकर जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका से मुलाकात की। मजदूरों के अनुसार जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो दिन के अंदर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब मजदूरों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या का समाधान कर उन्हें दोबारा काम दिलाने की दिशा में कार्रवाई करेगा।
अनुज मौर्य/ प्रतीक सिंह रिपोर्ट


