THE REPORTS TODAY News Desk
- March 10, 2026
पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल घरेलू ग्राहकों और अस्पतालों जैसी जरूरी जगहों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी जाएगी। जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। होटलों और इंडस्ट्रीज के लिए गैस सप्लाई का फैसला अब एक विशेष कमेटी करेगी।

दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे तनाव और तनावपूर्ण हालातों की वजह से फ्यूल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। इसे देखते हुए भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने LPG की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए कमर कस ली है। मंत्रालय ने तेल कंपनियों और रिफाइनरीज को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अब एलपीजी का ज्यादा प्रोडक्शन करें। इस बढ़े हुए प्रोडक्शन का इस्तेमाल मुख्य रूप से घरेलू गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा ताकि आम जनता को रसोई गैस की कमी महसूस न हो।p!
बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव
सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर एक सख्त नियम लागू कर दिया है। अब दो गैस सिलेंडरों की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर होना जरूरी है। इसका मतलब है कि एक बार सिलेंडर बुक करने के बाद आप अगले 25 दिनों तक दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। मंत्रालय का मानना है कि इस कदम से गैस की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग यानी कालाबाजारी पर लगाम लगेगी। अक्सर देखा जाता है कि सप्लाई कम होने की खबर मिलते ही लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर स्टोर करने लगते हैं, जिससे असली जरूरतमंदों को परेशानी होती है।
अस्पतालों और स्कूलों को मिलेगी प्राथमिकता
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए अपने पोस्ट में साफ किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता घरेलू इस्तेमाल और देश के जरूरी संस्थानों को गैस पहुंचाना है। बाहर से मंगाई जाने वाली यानी इंपोर्टेड एलपीजी की सप्लाई अब सबसे पहले अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे जरूरी नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर को दी जाएगी। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश की सेहत और शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में गैस की कमी के कारण कोई रुकावट न आए।
होटल और इंडस्ट्रीज के लिए बनेगी कमेटी
बाकी दूसरे नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर, जैसे कि रेस्टोरेंट्स, होटल और बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए गैस सप्लाई के नियम थोड़े अलग रखे गए हैं। इन सेक्टर्स को कितनी और कैसे गैस सप्लाई दी जाएगी, इसके लिए एक खास कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स शामिल होंगे। यह कमेटी अलग-अलग इंडस्ट्रीज की डिमांड और उनके आवेदन को रिव्यू करेगी और उसके बाद ही सप्लाई पर फैसला लिया जाएगा। इससे गैस के बंटवारे में पारदर्शिता बनी रहेगी और इमरजेंसी हालातों में भी सिस्टम सही तरीके से काम करेगा।
अनुज मौर्य रिपोर्ट


