घरार नदी के श्रमदान को मनरेगा के तहत दर्शाने पर कामगारों एवं अधिकारियों में ठनी

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मुख्यमंत्री को भेजा पत्र , गोपनीय जांच कराने की मांग

राकेश कुमार अग्रवाल

बांदा। महानगरों से लौटे कामगारों को काम न मिलने पर उनके द्वारा श्रमदान कर घरार नदी को पुनर्जीवन देने की गूंज लखनऊ तक जाने के बाद प्रशासन ने अपनी किरकिरी होते देख श्रेय लूटने के लिए मनरेगा के तहत काम को दर्शा दिया है। जिससे मजदूरों और जिले के विकास विभाग में ठन गई है।

शपथ पत्र के साथ मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मजदूरों ने बताया है कि उन्होंने १० जून से १८ जून तक श्रमदान कर घरार नदी को वापस पानी से लबालब कर दिया। ऐसे में विकास विभाग के जिले के सभी अधिकारी काम को मनरेगा का ठहराने के लिए न केवल मौके पर शिलापट गाड चुके हैं बल्कि उस काम को झुठलाने का प्रयास कर रहे हैं जिसे मजदूरों ने अपना पसीना बहाकर पूरा किया है। और तो और जब हम लोग काम कर रहे थे तब न सीडीओ न बीडीओ कोई भी मौके पर झांकने तक नहीं आया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से काम श्रमदान है या मनरेगा से किया गया है इसकी गोपनीय जांच कराने की मांग की है।

गौरतलब है कि सीडीओ बांदा पत्रकार वार्ता में काम को मनरेगा के तहत कराए जाने का दावा तक कर चुके हैं।

प्रशासन के इस रवैये से बाहर से लौटे कामगार काफी क्षुब्ध हैं। शपथ पत्र में सभी कामगारों ने हस्ताक्षर कर उनकी भावनाओं को आहत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

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