जिले के मुड़िया डीह आश्रम मे विराट दंगल कार्यक्रम मे कुश्ती करने पहुंचेंगे विदेशी पहलवान, विशेष मेहमान के रूप मे सुचिका तरियाल भी रहेंगी मौजूद

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रायबरेली। जनपद रायबरेली के बछरावां विकास क्षेत्र के ग्राम पठानगांव, कन्नांवा स्थित मुड़िया डीह आश्रम में आगामी सोमवार, 2 नवम्बर 2026 को विराट दंगल एवं मेले का भव्य आयोजन प्रस्तावित है। आश्रम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा से जुड़े इस वार्षिक आयोजन में अन्तरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान अपनी कुश्ती कला एवं शारीरिक कौशल का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनने के साथ ही भारतीय पारम्परिक कुश्ती संस्कृति और ग्रामीण लोकजीवन की समृद्ध परम्परा को सजीव रूप में प्रस्तुत करेगा। मुड़िया डीह आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है, जहाँ वर्षभर बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों का आवागमन बना रहता है। आश्रम द्वारा धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनमानस को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का निरन्तर प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में प्रत्येक वर्ष करवाचौथ के पश्चात पड़ने वाले प्रथम सोमवार को विराट दंगल एवं मेले का आयोजन किया जाता है। विराट दंगल इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होगा। कुश्ती भारतीय परम्परा में केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम, धैर्य, आत्मसंयम और खेल भावना का प्रतीक भी है। वहीं, मेला ग्रामीण संस्कृति, पारस्परिक सौहार्द और सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने वाला ऐसा अवसर है, जो क्षेत्र की लोकपरम्पराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धार्मिक आस्था और लोकसंस्कृति का यह समन्वय आयोजन को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

मुख्य आकर्षण दंगल का

विशाल दंगल में थाईलैंड साउथ अफ्रीका नेपाल व अन्य देशो से कुश्ती पहलवान पहुंचेंगे रायबरेली की पावन धरती पर। वही विशेष मेहमान के रूप मे सुचिका तरियाल दंगल मे मौजूद रहेगी आपको बताते चलें  सुचिका तरियाल ने आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के पारंपरिक MMA -60किग्रा इवेंट में कांस्य पदक जीता। यह उनके कॉम्बैट स्पोर्ट्स करियर की एक और अहम उपलब्धि है, जिसमें जूडो, कुराश, जिउ-जित्सु और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स जैसे खेल शामिल रहे हैं।उन्होंने क्वार्टरफाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर इन गेम्स में भारत का पहला पदक पक्का किया। सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिलने के नियम के कारण इस जीत से सुचिका तरियाल का पोडियम पर स्थान पक्का हो गया।इसके बाद सेमीफाइनल में तरियाल का मुकाबला सिंगापुर की टेओ हुई हून से हुआ। इस मुकाबले में वह 3-0 से हार गईं और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।यह पदक इसलिए भी खास था, क्योंकि MMA ने आइची-नागोया 2026 में एशियाई खेलों में अपना डेब्यू किया था। यह कॉन्टिनेंटल गेम्स में सुचिका तरियाल की दूसरी मौजूदगी भी थी। इससे पहले उन्होंने हांगझोऊ 2023 में कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।हालांकि, सुचिका तरियाल का कॉम्बैट स्पोर्ट्स का सफर एमएमए में आने से बहुत पहले ही शुरू हो गया था।16 अगस्त 1990 को हरियाणा के रोहतक में जन्मीं सुचिका तरियाल ने 12 साल की उम्र में जूडो सीखना शुरू किया था। इसकी वजह एक ऐसी घटना थी, जो उनके जीवन से जुड़ी थी। उन्हें परेशान किया गया था, जिसके बाद उन्होंने खुद का बचाव करना सीखने का फैसला किया।उन्होंने नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ट्रेनिंग शुरू की। बाद में पालम के दादा देव मंदिर सेंटर चली गईं। तरियाल ने बाद में SAI भोपाल में भी ट्रेनिंग ली, जो एक कॉम्पिटिटिव जूडोका के तौर पर उनके विकास का एक अहम पड़ाव था।सुचिका तरियाल का जूडो करियरसुचिका तरियाल के खेल करियर की नींव जूडो बना।

अनुज मौर्य रिपोर्ट

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