तो कही जिम्मेदार अधिकारियो की मिली भगत से गुटखा -पान मसाला-सिगरेट की करी जा रही कालाबाजारी

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सुपर मार्केट सहित अन्य जगहों पर गुटका-पान मसाला-सिगरेट की जोरों की कालाबाजारी छोटे दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान

रायबरेली-बीती रात समय करीब 10 बजे गुटखा खरीदने को लेकर विवाद हो गया जिसको लेकर ग्रह को और छोटे दुकानदारों में बड़े स्टाकर और होलेसलरों के खिलाफ विरोध जताया है दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया बजट में गुटका, पान मसाला और सिगरेट पर लगाए गए नए टैक्स के बाद रायबरेली में इन वस्तुओं की कालाबाजारी जोरों पर है। होलसेलर पुराने स्टॉक को भी निर्धारित मूल्य से कहीं ज्यादा दामों पर बेच रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों दोनों में रोष व्याप्त है।
कोतवाली नगर क्षेत्र के सुपर मार्केट के पास स्थित कई होलसेल दुकानों पर यह गड़बड़ी सामने आई है। स्थानीय छोटे दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि होलसेलर अब उन्हें एक-एक डिब्बे या पैकेट पर 5 से 10 रुपये तक अतिरिक्त दाम वसूल रहे हैं। “पुराना स्टॉक है, जिस पर पहले वाला टैक्स लगा हुआ था, लेकिन होलसेलर कह रहे हैं कि नया रेट लागू हो गया है। हम मजबूरन 1-2 रुपये बढ़ाकर बेच रहे हैं, वरना हमारा मुनाफा ही खत्म हो जाएगा,” एक दुकानदार ने गुस्से में कहा।

ग्राहकों का कहना है कि दुकानदार अब 2 रुपये का गुटका 5 रुपये में, 5 रुपये का पान मसाला 8-10 रुपये में और सिगरेट के पैकेट पर भी 10-20 रुपये तक ज्यादा ले रहे हैं। सुपर मार्केट के पास एक ग्राहक ने विरोध करते हुए कहा, “ये पुराना माल है, नया टैक्स तो अभी आया है। फिर भी नया रेट क्यों? ये साफ कालाबाजारी है।”

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है। कई लोगों ने दुकानदारों से बहस की और पुराने स्टॉक को पुराने दामों पर बेचने की मांग की। एक बुजुर्ग ग्राहक ने कहा, “सरकार टैक्स बढ़ाती है तो नया माल महंगा बिके, लेकिन जो पहले से दुकानों में पड़ा है उसे क्यों महंगा बेच रहे हैं? ये लूट है।”

जानकारों का मानना है कि नए टैक्स के कारण थोक विक्रेताओं को लग रहा है कि जल्द ही पुराना स्टॉक बिक जाएगा, इसलिए वे अभी से ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश में हैं। छोटे दुकानदारों की मजबूरी यह है कि अगर वे होलसेलर से महंगे दाम पर माल नहीं खरीदेंगे तो उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी।

कोतवाली पुलिस को इस मामले की जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर प्रशासन जल्द हस्तक्षेप नहीं करता तो यह कालाबाजारी और बढ़ेगी और आम आदमी को महंगाई का ज्यादा बोझ उठाना पड़ेगा।

रायबरेली के उपभोक्ता फोरम से व्यापारी संघ ने इस मुद्दे पर जिला प्रशासन से तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है।

अनुज मौर्य रिपोर्ट

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