नहर हादसे में पिता को खोने वाले मासूमों की ढाल बनीं कमला फाउंडेशन की अध्यक्ष; ‘एक्शन मोड’ में दिखीं पूनम सिंह ने खुद खड़े होकर दूर किया घर का अंधेरा
रायबरेली-राजनीति जब सेवा का माध्यम बनती है, तो बदलाव धरातल पर दिखता है। सदर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पूरे दुबे (ग्राम पंचायत लोधवारी) में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। क्षेत्र की राजनीति में अपनी सक्रियता और जन-सरोकारों के लिए पहचानी जाने वाली कमला फाउंडेशन की अध्यक्ष पूनम सिंह आज पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में नजर आईं। उन्होंने न केवल अनाथ हुए बच्चों को गले लगाया, बल्कि उनके घर के बाहर पसरे अंधेरे को भी दूर करने का बीड़ा उठाया।
अनाथ मासूमों की ‘ढाल’ और ‘रोशनी’ बनीं पूनम सिंह
तीन दिन पहले नहर दुर्घटना में जान गंवाने वाले 44 वर्षीय चिंतामणि रैदास के घर पूनम सिंह दोबारा पहुंचीं। मृतक के चार मासूम बच्चे—मनु, मांडवी, मनीष और संदीप—आज पूरी तरह अनाथ हो चुके हैं। मां का साथ पहले ही छूट गया था, अब पिता के जाने से घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया था। बच्चों की दयनीय स्थिति देख पूनम सिंह ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें भोजन सामग्री और वस्त्र प्रदान किए।
अंधेरे से मुक्ति: अपनी ओर से कराई स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था
मुलाकात के दौरान पूनम सिंह ने गौर किया कि घर के बाहर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण शाम ढलते ही गहरा अंधेरा छा जाता था, जो सुरक्षा और मानसिक शांति के लिहाज से भी ठीक नहीं था। इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए उन्होंने अपनी ओर से स्ट्रीट लाइट लगवाई। अब इन मासूमों का आंगन रात के वक्त अंधेरे में नहीं डूबेगा।
“भोजन और कपड़े तात्कालिक जरूरत हैं, लेकिन इन बच्चों को सुरक्षित महसूस कराना हमारी प्राथमिकता है। घर के बाहर अंधेरा था, जिसे दूर करने के लिए स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है। मेरी कोशिश है कि इन बच्चों को कभी यह महसूस न हो कि वे अकेले हैं।”
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी ‘सक्रियता‘
रायबरेली सदर में पूनम सिंह की इस पहल की जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नेता अक्सर आश्वासन देकर भूल जाते हैं, लेकिन पूनम सिंह ने दोबारा आकर और बुनियादी सुविधाओं (रोशनी, भोजन, वस्त्र) का इंतजाम कर यह साबित किया है कि उनका सेवा भाव चुनावी नहीं, बल्कि आत्मीय है।
अनुज मौर्य रिपोर्ट


