बैंक ऑफ बड़ौदा ने बांटे पुलिस को छाते

20228

इनपुट – गौरव

एक तरफ समूचा विश्व करोना वायरस से निजात पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, सभी देश सामूहिक रूप से इससे बाहर निकलने के रास्ते खोज रहे हैं। देशों के राष्ट्रध्यक्ष अपने अपने नागरिकों को महामारी से बचाने के लिए तरह तरह से प्रेरित कर रहे हैं। उन्हें हर तरह के संकट से निबटने के लिए उनके मोरल को बूस्टअप भी कर रहे हैं। एक तरफ लोगों को करोना से निपटने के तरीके बताए जा रहे हैं तो साथ ही गिरती हुई अर्थव्यवस्था भी लोगों के सामने एक बड़ी समस्या के रूप में आ रही है। ऐसी अवस्था में लोगों के सामने एक दूसरे की मदद करने और एक साथ सामूहिक रूप से लड़ाई के लिए तैयार रहने का पाठ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पढ़ा रहे हैं। इन सबके बीच देश का अग्रणी बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा भी करोना की लड़ाई में अपनी भूमिका स्पष्ट कर चुका है और वह भी इस लड़ाई में सीधे मदद के लिए कूद चुका है ।

क्या किया बैंक अगफ बड़ोदा ने

देश के अग्रणी बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा ने करोना के खिलाफ इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के पुलिस कर्मियों के लिए अपना योगदान देते हुए उन्हें धूप और गर्मी से बचने के लिए छाते प्रदान किए हैं। बैंक आफ बड़ौदा के रीजनल मैनेजर ए. के. दास का मानना है की दिन भर कड़ी गर्मी में बिना किसी छाए के यह पुलिसकर्मी लोगों के लिए दिन भर कार्य करते हैं उनकी मदद के लिए दिन भर तैयार रहते हैं। फिर वह चाहे सिविल पुलिस के सिपाही हों या ट्रैफिक पुलिस के हों। जितने भी पुलिस वाले करोना के खिलाफ इस मुहिम में साथ है हम सब उन्हें छाते प्रदान करेंगे ताकि उन्हें गर्मी से कुछ राहत मिल सके।

क्या सोचते है पुलिसवाले

दिनभर भरे चौराहे पर लोगों की मदद के लिए खड़े यह पुलिसकर्मी और ट्रैफिक के सिपाहियों से हमारे रिपोर्टर ने बात की तो उन्हें बैंक के इस कदम से काफी खुश नजर आए। उन्हें यह गिफ्ट उन्हें उस वक़्त मिला जब शायद उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। मतलब इस वक्त तापमान का पारा 30 सेंटीग्रेड के ऊपर पहुंच रहा है अब ऐसे में उन्हें धूप से बचाने के लिए छाते की जरूरत भी थी। ऐसे में उन्हें मुफ्त में छाता मिलना किसी बड़े उपहार से कम नजर नहीं आ रहा फिलहाल उच्च अधिकारियों के कंसल्ट से उन्हें मिला है तो इसलिए वह कैमरे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है लेकिन मन ही मन वह बड़े खुश होंगे कि आखिर उन्हें भी और उनके कामों से खुश होकर किसी ने उन्हें कुछ उपहार तो दिया नहीं तो अमूमन पुलिस के हिस्से लोगों के गुस्से और गालियों का ही उपहार आता था ।

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