सरकार के ताबूत की आखिरी कील साबित होंगे फार्मासिस्ट- कपिल चौधरी

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  • डीपीए यूपी के आहवान पर फार्मासिस्टों ने किया दो घंटे का कार्य बहिष्कार
  • 17 दिसंबर से शुरू होगी फार्मासिस्टों की प्रदेशव्यापी बेमियादी हडताल
  • इस दौरान फार्मासिस्टों ने एकत्र होकर जमकर की नारेबाजी
    ग्रेटर नोएडा-सरकार की वादाखिलाफी से नाराज डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश का आंदोलन धीरे-धीरे रफ्तार पकडता जा रहा है। 20 सूत्रीय मांगों को लेकर बीते 4 दिसंबर से शुरू हुए डीपीए का यह प्रदेशव्यापी आंदोलन अब अपने तीसरे चरण में पहुंच चुका है। जिसके तहत गुरूवार को गौतमबुद्धनगर के तमाम सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्टों ने दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया। जिसके चलते नोएडा जिला अस्पताल से लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा सेवाएं दो घंटे तक पूरी तरह प्रभावित रहीं। फार्मासिस्टों की हडताल के चलते मरीजों को भी अस्पतालों में समस्याओं का सामना करना पडा।
    डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के पूर्व संयुक्त मंत्री एवं जिला मंत्री कपिल चौधरी ने कहा कि सरकार फार्मासिस्टों व कर्मचारियों के साथ लगातार वादाखिलाफी कर रही है। जिससे नाराज फार्मासिस्ट संवर्ग प्रदेशव्यापी आंदोलन पर है। लेकिन अभी तक भी सरकार के कानों पर जंू तक नहीं रैंगी है। ऐसे में फार्मासिस्ट अपने आंदोलन को और तेज करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अगर जल्द उनकी 20 सूत्रीय मांगों पर विचार नहीं करती है तो उनका यह आंदोलन 16 दिसंबर तक इसी तरह 2 घंटे प्रतिदिन कार्य बहिष्कार के रूप में जारी रहेगा। वहीं 17 दिसंबर से 19 दिसंबर तक आपातकालीन एवं पोस्टमार्टम सेवाओं को छोडकर पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार चलेगा। जिसके बाद फार्मासिस्ट तमाम स्वास्थ्य सेवाओं को बंद करने पर मजबूर होंगे। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि सरकार यदि अपने इसी अडियल रवैये पर रही तो फार्मासिस्टों का यह आंदोलन उसके ताबूत की आखिरी कील साबित होगा। इस अवसर पर डीपीए गौतमबुद्धनगर के जिलाध्यक्ष रामनिवास बरहेला, महेश वर्मा, दीपक शर्मा, कमल कसाना, वीरदेव कौशिक, प्रीती शिवहरे, गिरेंद्र सिंह चौहान, संजीव कौशिक, बैजनाथ वर्मा, ऋषिदेव, भूमेश दीक्षित, पी के शर्मा आदि फार्मासिस्ट मौजूद रहे।
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