रिकॉर्ड में ‘नारी शक्ति’, मौके पर सिर्फ ‘दाढ़ी-मूंछ’!
आखिर किसका पेट भर रही हैं बसेला की ये कागजी महिलाएं?
हमीरपुर: विकासखंड राठ की ग्राम पंचायत बसेला में भ्रष्टाचार का एक ऐसा “जादुई मॉडल” सामने आया है, जिसे देखकर विज्ञान भी शरमा जाए! यहाँ सरकारी सिस्टम की आँखों में धूल झोंककर महिलाओं को कागजों में तो काम करते दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत की तस्वीरों में वे पूरी तरह गायब हैं।
तारीख 24/02/2026 को बसेला में मनरेगा कार्य के दौरान मस्टर रोल संख्या 8846 जारी हुआ। इस रिकॉर्ड के मुताबिक, मौके पर 4 महिला श्रमिक पसीना बहा रही थीं। लेकिन जब ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ (NMMS) पर अपलोड की गई सरकारी फोटो को जूम करके देखा गया, तो प्रशासन के दावों की पोल खुल गई।
रिकॉर्ड कहता है: महिलाएं काम कर रही हैं
फोटो चीख रही है: मौके पर सिर्फ पुरुष श्रमिक मौजूद हैं!
बड़ा सवाल: आखिर ये ‘अदृश्य’ मजदूर कौन हैं?
क्या हमीरपुर प्रशासन के पास ऐसी कोई तकनीक आ गई है जिससे महिलाएं पुरुषों के रूप में दिखाई देती हैं? या फिर यह ग्राम विकास अधिकारी (BDO), रोजगार सहायक और मेट की मिलीभगत का वो खेल है, जिसमें गरीब मजदूरों का हक मारकर अपनी जेबें गरम की जा रही हैं?
DPC और CDO साहब ध्यान दें: जब ऐप पर फोटो अपलोड की गई, तो मॉनिटरिंग सेल में बैठे अधिकारियों ने इसे ‘रिजेक्ट’ क्यों नहीं किया?
क्या NMMS ऐप सिर्फ दिखावे के लिए है, जब फर्जी हाजिरी इतनी आसानी से लग रही है?
उन 4 महिलाओं के नाम पर निकलने वाला पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
“यह सिर्फ एक मस्टर रोल का मामला नहीं है, बल्कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को बसेला पंचायत के जिम्मेदारों ने ठेंगे पर रख दिया है। अगर फोटो और मस्टर रोल का मिलान हर पंचायत में हो जाए, तो करोड़ों का घोटाला सामने आएगा।”
अब गेंद आपके पाले में है! क्या इन ‘कागजी महिलाओं’ के नाम पर हो रही लूट पर ताला लगेगा, या फिर “जांच का आश्वासन” देकर फाइल दबा दी जाएगी?
विवेक कुमार यादव रिपोर्ट


