न्याय की आस में विकलांग के साथ अन्य लोग भी दर-दर भटकने को मजबूर
गाटा संख्या के आधार पर 221 खाद के गड्ढे में दर्ज 222 खलियान में तो वही 131 ऊसर में दर्ज
समस्त गाटा संख्या के आधार पर जमीने प्रशासन के अधीन
रायबरेली– मामला रायबरेली के तहसील डलमऊ थाना जगतपुर ग्राम सेवरा का निकल कर आया है जहां विकलांग देवेंद्र कुमार ने शिकायती पत्र देते हुए बताया कि बीते कुछ माह पहले अवगत कराया था कि महोदय आपके द्वारा धारा 67 की कार्रवाई की गई, लेकिन उस कार्रवाई में अभी भी कुछ मकान इस बंजर खलिहान और ग्राम समाज की जमीन में खड़े हैं जिन्हें ना तो गिराया गया है ना ही उन पर कोई कार्रवाई की गई है लेखपाल और डलमऊ तहसील की मिली भगत से अभी भी मकान वहां पर खड़े हैं ना तो उन पर कोई कार्रवाई हुई है ना ही कोई एक्शन।जहां समस्त ग्राम वासियों ने गाटा संख्या 221 131 और 222 को लेकर मीडिया के सामने दर्द भरे आंसू बयां किया है।वही विकलांग देवेंद्र ने कहा मेरी जमीन की गाटा संख्या 221 है मैं खुले आसमान में 4 महीने से अपना जीवन यापन कर रहा हूं लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा ना मेरी कोई सुनी गई ना ही मुझे कोई न्याय मिला।पीड़ित विकलांग ने कहा साहब में न्याय चाहता हूं अगर मेरे सर से छत को हटा दिया गया है तो अन्य पर कार्रवाई क्यों नहीं सवाल जिला प्रशासन पर।
दरअसल जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने 23 अक्टूबर 2025 को आदेश दिया था की गाटा संख्या 131 गाटा संख्या 221 गाटा संख्या 222 जो की उसर खाद के गड्ढे खलियान दर्ज है इन पर जिला प्रशासन के आदेश पर एक गंभीर कार्रवाई की गई थी जहां 131 में उसर दर्ज है 222 में खलियान दर्ज है तो वहीं 221 में खाद के गड्ढे दर्ज हैं, लेकिन सवाल जिला प्रशासन पर क्योंकि जब उनके अधीनस्थ कर्मचारी लेखपाल और तहसीलदार डलमऊ एसडीएम मौके पर पहुंचते हैं तो कुछ मकानों को बुलडोजर चलाकर धराशाही कर दिया जाता है लेकिन विकलांग व्यक्ति के साथ-साथ अन्य लोगों को कहना है आज भी इस नंबर पर दो मकान बने हुए हैं जिनका ना तो गिराया गया है ना ही उन पर कोई कार्रवाई की गई है ग्रामीणों ने आरोप लगाया है जिला प्रशासन ने एक तरफा कार्रवाई नहीं की है फिलहाल 67 की कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था जल्द कार्रवाई होगी लेकिन कई महीने वाले हैं अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है आपको बताते चलें 26 अक्टूबर 2025 को लगभग 11:00 बजे तीन चार मकानों को गिरा दिया गया था फिलहाल अन्य लोगों ने भी बताया मकान पूरी तरीके से नहीं बने थे चारों तरफ पिलर खड़े कर दिया गया था जिन्हें उच्च अधिकारियों के आदेश पर आज गिराया जा रहा है और जो भी मकान सरकारी जमीन की गाटा संख्या में बने हैं उन्हें भी गिराने का काम जल्द से जल्द किया जाएगा लेकिन 4 से 5 महीने बीत गए अब तक वह मकान नहीं गिराए गए जो की तीन से चार मंजिल बनकर खड़े हुए हैं आखिरकार प्रशासन ने एक तरफा कार्रवाई क्यों नहीं की या फिर क्षेत्र के हल्का लेखपाल की मिली भगत से ले देकर अभी भी वह मकान खड़े हुए हैं अब देखना है की खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।


