पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के पेय उद्योग (Beverage industry) पर भी दिखने लगा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक युद्ध के चलते सप्लाई चेन प्रभावित होने से बीयर की उपलब्धता घट सकती है और कई ब्रांड्स के दाम बढ़ने की संभावना है।
वैश्विक कंपनियां (Heineken, AB InBev) और (Carlsberg) ने भारत में सप्लाई बाधित होने और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई है।
संकट की बड़ी वजहें
- कांच और एल्युमीनियम की कमी: प्राकृतिक गैस आपूर्ति बाधित होने से कांच की बोतल बनाने वाली इकाइयों पर असर पड़ा है। बोतलों की कीमतों में करीब 20% तक उछाल आया है।
- गैस पर निर्भरता: भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। क्षेत्रीय तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने से उत्पादन लागत बढ़ी है।
- पैकेजिंग महंगी: पेपर कार्टन, लेबल और अन्य पैकेजिंग सामग्री के दाम भी तेजी से बढ़े हैं।
कीमतें बढ़ाने की मांग
Brewers Association of India के महानिदेशक विनोद गिरी ने कहा कि लागत में भारी वृद्धि के चलते उत्पादन प्रभावित हो रहा है। एसोसिएशन ने राज्य सरकारों से बीयर की कीमतों में 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की अनुमति मांगी है।
गर्मियों का सीजन बीयर की बिक्री का चरम समय होता है। ऐसे में संकट जारी रहने पर शादियों और गर्मी के मौसम में कमी की स्थिति बन सकती है।
तनाव कम करने पर भारत का जोर
इसी बीच नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत में पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और Strait of Hormuz को खुला रखने की जरूरत पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जलमार्ग वैश्विक शांति, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग बाधित रहा तो ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
अनुज मौर्य रिपोर्ट


