रायबरेली-सिविल कोर्ट परिसर में न्यायिक अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार, अधिवक्ताओं के प्रति दुर्व्यवहार और न्यायालय परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। इन समस्याओं के विरोध में 17 अगस्त 2026 से सिविल कोर्ट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने का आयोजन किया गया है। धरने को लेकर लगाए गए बैनर में अधिवक्ताओं से आंदोलन में सहयोग की अपील की गई है।
धरने के आयोजकों का आरोप है कि सिविल कोर्ट के कुछ न्यायिक अधिकारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालय में आने वाले अधिवक्ताओं के साथ अपेक्षित सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही न्यायालय परिसर में विभिन्न प्रकार की अव्यवस्थाओं के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
धरने के संबंध में लगाए गए बैनर में स्पष्ट रूप से न्यायिक अधिकारियों में कथित भ्रष्टाचार, अधिवक्ताओं के प्रति दुर्व्यवहार तथा परिसर की अव्यवस्थाओं को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बताया गया है। अधिवक्ताओं ने इन समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की बात कही है।
17 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन
बैनर के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 17 अगस्त 2026 से सिविल कोर्ट परिसर में की गई है। आयोजकों ने इसे अनिश्चितकालीन बताते हुए कहा है कि जब तक संबंधित समस्याओं पर उचित कार्रवाई और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए जाते, तब तक धरना जारी रखा जाएगा।
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालय परिसर न्याय दिलाने का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में वहां काम करने वाले अधिवक्ताओं और आने वाले वादकारियों के लिए बेहतर एवं व्यवस्थित वातावरण होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि मौजूदा परिस्थितियों में कई स्तर पर समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन पर जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अधिवक्ताओं से सहयोग की अपील
धरने के लिए लगाए गए बैनर में सभी अधिवक्ताओं से आंदोलन में सहयोग की अपील की गई है। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन अधिवक्ताओं के सम्मान, न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कोर्ट परिसर की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है।
हालांकि, बैनर में लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में इन आरोपों पर संबंधित न्यायिक अधिकारियों अथवा प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सिविल कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के अनिश्चितकालीन धरने से न्यायिक व्यवस्था और परिसर की गतिविधियों पर लोगों की नजर बनी हुई है।
अनुज मौर्य रिपोर्ट


