National Desk –Physhologist और Mental Health Expert डॉ रमा परवीन ने बताया कि हर 40 से 43 सेकंड में एक इंसान सुसाइड से अपनी जान गंवा देता है. आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि सुसाइड केस ज्यादातर यंग जनरेशन में सामने आते हैं
हर साल 10 सितंबर को World Suicide Prevention Day मनाया जाता है, ताकि सुसाइड की रोकथाम की जा सके और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा सके. हर 100 मौतों में से 1 मौत सुसाइड की वजह से होती है. आप हैरान रह जाएंगे कि हर साल 7 लाख से भी ज्यादा लोग सुसाइड करते हैं. इंसान की जिंदगी बहुत कीमती होती है और उसे इस तरह खो देना बेहद दुखद है. आपके आसपास भी कभी न कभी किसी व्यक्ति के सुसाइड करने की खबर आई होगी. उसकी मौत के बाद मन में यह सवाल भी आता होगा कि आखिर उसने ऐसा कदम क्यों उठाया? कई बार हमें लगता है कि शायद हम उसे बचा सकते थे, लेकिन समय रहते उसके संकेतों को समझ नहीं पाए. कई बार इंसान खुद अपने व्यवहार और बातों के जरिए संकेत देता है कि वह मानसिक रूप से बहुत परेशान है. लेकिन आसपास के लोग उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते हैं. इंसान की जिंदगी में कई तरह की परेशानियां और तनाव आते हैं. कभी-कभी परिस्थितियां इतनी मुश्किल लगने लगती हैं कि व्यक्ति को अपने भविष्य में कोई उम्मीद नजर नहीं आती. ऐसे समय में कुछ लोग सुसाइड के बारे में सोचने लगते हैं. लेकिन अगर आप समय रहते किसी व्यक्ति के व्यवहार में आने वाले बदलावों और उसकी बातों पर ध्यान दें, तो उसकी मदद की जा सकती है. इसके लिए यह समझना जरूरी है कि कौन से संकेत बताते हैं कि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से गंभीर परेशानी में है और उसे आपकी मदद की जरूरत है.
7 लाख से ज्यादा हर साल लगाते हैं मौत को गले
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक 7 लाख 20 हजार लोग सुसाइड करते हैं. हर 40 से 43 सेकंड में एक इंसान सुसाइड से अपनी जान गंवा देता है. आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि सुसाइड केस ज्यादातर यंग जनरेशन में सामने आते हैं. WHO के मुताबिक 15 से 29 साल की उम्र वाले लोगों के सुसाइड केस ज्यादा सामने आते हैं. इस उम्र में इंसान के जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं और अगर वो खुद को अकेला महसूस करने लगे, तो जरूरी नहीं है कि वो इसे झेल पाएं, इसलिए लोग मरने का रास्ता चुन लेते हैं. दुनिया में होने वाली हर 100 मौत में से 1 मौत सुसाइड की होती है.
लोग क्यों उठाते हैं ऐसा कदम
डॉ रमा परवीन ने The REPORTS Today की टीम को बताया कि क्या आपके मन में ये सवाल आया है कि कोई इंसान मरना क्यों चाहता है? आखिर वो सुसाइड ही क्यों करते हैं, जब सभी को एक न एक दिन मरना ही है, फिर वो अकाल मौत क्यों चाहते हैं? ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें मरने की कोई जल्दी होती है. इसके पीछे बहुत सी वजह होती हैं. इंसान के मन में खुद को लेकर तरह-तरह के सवाल चलते हैं. मेंटल डिसऑर्डर उनमें से एक है. इंसान अगर डिप्रेशन, एंग्जायटी, ओवरथिंकिंग का शिकार हो जाता है, तो उसके मन में खुद को लेकर ही शंका बैठ जाती है. वो पॉजिटिव चीजों में भी नेगेटिव थिंकिंग ले आते हैं. उन्हें लगता है कि वो लाइफ में कुछ नहीं कर पाएंगे, उन्हें नींद की समस्या हो जाती है. कई बार किसी अपने को खोने का गम भी लग जाता है, जिसकी वजह से वो सदमे में चले जाते हैं. लाइफ में कोई बड़ा धोखा या कोई ऐसी घटना, जिससे वो बहुत ज्यादा ही हर्ट हो जाएं. कई बार असफलता भी इसका कारण बन जाती है, जिसकी वजह से इंसान को लगने लगता है कि वो समाज के ऊपर बोझ है. ऐसी बहुत सी चीजें हो जाती हैं, जो इंसान के मन में बैठ जाती हैं. अगर वो चीज लंबे समय तक मन में चलती रहे, तो इंसान मरना ही बेहतर समझता है.
शुरुआती चेतावनी संकेत
सुसाइड से पहले इंसान कुछ ऐसी चीजें करना शुरू कर देता है, जिससे ऐसा पता लगाया जा सकता है कि वो शायद सुसाइड कर सकता है.
जिंदगी को खत्म करने की बात करने लगता है. जैसे, “मैं जीना नहीं चाहता”, “काश मैं कभी पैदा ही नहीं होता”, “अब
सब खत्म करने का मन करता है” जैसी बातें बोलना.
बार-बार यह कहना कि “मैं सब पर बोझ हूं” या “मेरे जाने के बाद सब खुश रहेंगे.”
यह जताना कि वे एक ऐसी स्थिति या दर्द में फंसे हैं, जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है.
दोस्तों, परिवार और पसंदीदा सामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बना लेना. अकेला रहना पसंद करना.
लगातार उदास, निराश या खालीपन महसूस करना.
अचानक बहुत ज्यादा खुश हो जाना और अचानक चुप हो जाना. सामान्य से हटकर अलग बर्ताव करना.
छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा गुस्सा होना या मूड स्विंग्स होना.
बहुत ज्यादा सोना या बिल्कुल भी नींद न आना.
अचानक से बहुत कम खाना या बहुत ज्यादा खाना खाना आदि.
जरूरी नहीं है कि इंसान बाहर से हंस रहा है, तो वो अंदर से भी खुश है. कई बार इंसान दिल में बहुत सी बातें लेकर बैठ जाता है और बाहर नॉर्मल दिखाने की एक्टिंग करता है, लेकिन आप अपनी कोशिश से किसी की जान बचा सकते हैं.
ऐसे बचा सकते हैं जान
डॉ उमा प्रवीन ने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर आपको लग रहा है कि कोई इंसान सुसाइड करने वाला है, तो उससे सीधे जाकर बात करें. जब आप सीधे इंसान से पूछोगे कि सुसाइड करने वाले हो क्या, तो आप उसके हाव-भाव से ही समझ जाएंगे कि उसके मन में क्या चल रहा है. अगर वो इस बात पर थोड़ा अजीब सा रिएक्ट करने लगे, तो हो सकता है कि वो आपसे छिपाना चाहे. इसलिए उसे ये यकीन दिलाना भी बहुत जरूरी है कि आप उसके साथ हर कदम पर खड़े हैं, वो अकेला नहीं है. जीवन में हर समस्या का समाधान है. इसलिए मरना कोई रास्ता नहीं है. जब आप उस इंसान को साथ होने का एहसास दिलाएंगे, तो वो आपको अपने मन की बात बता पाएगा. आपको सबसे पहले उसकी बात को ध्यान से सुनना है. फिर उसकी समस्या के समाधान बताने हैं, लेकिन कभी भी इस समय पर उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए. क्योंकि जब इंसान मरने का मन बना लेता है, तो वो कोशिश भी शुरू कर देता है. इसलिए भूलकर भी उसे अकेला न छोड़ें. आप उसे कामों में बिजी कर दें. फैमिली को उसके साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए. उसे समझाना चाहिए कि कोई बात नहीं, लाइफ में जो कुछ भी हो गया. पुरानी बातों को छोड़ो और आगे की सोचो, हम तुम्हारे साथ हैं. अगर आपको स्थिति गंभीर लग रही है, तो आप किसी डॉक्टर या काउंसलर से बात कर सकते हैं.
अनुज मौर्य रिपोर्ट


