आपसे कुछ भी मांगने अब ये कभी नहीं लौटेंगे

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कोरोना वायरस से होनी वाली मौतों की जब भी गिनती होगी उसमे खाना-पानी और परिवहन मांगने वाले मजदूरों की मौतें भी जोड़ी जाएंगी। सरकार ने लाकडाउन कर दिया जिसके लिए देश अचानक तैयार नही था। लिहाजा भूख और बेबसी ने देश की आंखों में आंसू ला दिए। दर्द जब हद से गुजरने लगा तो सरकारों ने भी लाकडाउन में ही मजदूरों को उनके ठिकानों पर पहुचाने का निर्णय लिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि भारी तादाद में पलायन कर रहे लोगो तक हुक्मरान न तो अपनी बात सीधे पहुचा पाए न ही उनके दिलों में जगह ही बना पाए। इन मजदूरों की आवाज सरकारों तक पहुचाने वाले पत्रकार हिन्दू-मुस्लिम और अमेरिका-पाकिस्तान से फुरसत ही नही पा सके। इंतजार के आंसू सूखते उसके पहले लोग अपने अपने हिसाब से घरों के लिए निकल पड़े। परदेश में भूख से मौत के पहले ही सर पर गठरी और बगल में दुधमुँहे को दबाकर निकले लोगो का सफर बीच मे टूट जाएगा ये किसी ने नही सोचा था। सड़क हादसे में मजदूर और गरीब तो रोज मर रहे हैं किंतु औरैया जैसी दुर्घटना ने असमाजिक असुरो की आंखे भी भिगो दी।

वैसे तो उत्तर प्रदेश में आने वाले मजदूरों के साथ रोजाना हादसे हो रहे हैं। लेकिन ख़ुद का रास्ता बनाते हुए दिल्ली से आए डीसीएम (मिनी ट्रक) में सवार कुछ लोग ढाबे पर चाय पीने के लिए रुके थे, तभी राजस्थान से आने वाले दूसरे ट्रक ने टक्कर मार दी। जो लोग बाहर चाय पी रहे थे, वे बच गए। बाकी दोनों वाहनों में सवार 24 लोगों की की जान चली गई,35 लोग जख्मी हुए हैं।

कहाँ के थे अप्रवासी मजदूर

डीसीएम में सवार ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के थे। एक लंबा सफर तय कर औरैया के पास चिरूहली इलाके में एक ढाबे पर पहुंचे थे। पूरी रात डीसीएम में ही काटने के बाद सुबह होने वाली थी। लेकिन, इसे मजदूरों की बदकिस्मती कहें या काल का कुचक्र कि वे सुबह का सूरज नहीं देख पाए। जिंदगी की अंगड़ाई, मौत की आहट को नहीं भांप सकी। काली रात ने चंद लम्हों में सब कुछ खत्मकर दिया। यह औरैया हादसे की तस्वीर है। हादसे के बाद बचाव कार्य में पुलिसकर्मी जुटे रहे। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

सुबह होने से पहले चाय पीने के लिए रुके थे मजूदर


सुबह होने से पहले मजदूरों को चाय पीने की तलब लगी और शायद इसी चाय ने ही उनकी जिंदगी और मौत के बीच फासलाकर दिया। हादसे में मरने वालों में ज्यादातर मजदूर टक्कर मारने वाले ट्रक में थे। इसमें 30 मजदूर सवार थे। इस ट्रक में चूने की बोरियां लदी थीं। कई मजदूर नींद में ही मौत के आगोश में समा गए। घटना के बाद सामने आई एक तस्वीर में मजदूरों के सामान के ढेर को भी देखा जा सकता है। हादसा राजस्थान से आ रहे ट्रक ड्राइवर को झपकी लगने से हुआ। टक्कर के बाद दोनों ट्रक पलट गए। हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मदद के लिए पहुंचे। घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। दो दिन पहले मुजफ्फर नगर में बुधवार को 6 की मौत हो चुकी है।

मृतको की सूची

दूसरे हादसे में आज फिर गई 6 की जान

औरैया की घटना से दहल गए लोगो ने जैसे ही दुबारा टेलीविजन खोला खबर मिली कि सागर कानपुर मार्ग के छानवीला थाना अंतर्गत निवार घाटी सेमरा पुल के पास मजदूरों से भरा एक ट्रक पलट गया है, इस दुर्घटना में 19 मजदूरों घायल हो गए हैं और 6 की हुई मौत हो गई है। इसके अलावा कुछ घायल मजदूरों की स्थिति गम्भीर भी बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बंडा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया है। ज्यादातर मजदूर महाराष्ट्र से मजदूर बस्ती की ओर जा रहे थे। हादसे के स्थल की तस्वीरें हृदयविदारक हैं। मां के शव के पास बच्चे रोते और बिलखते हुए दिखाई दे रहे हैं।

आखिर कब होगी इस काली रात की सुबह

मजदूरों के पलायन की खबरों की वायरल तस्वीरे आपको विचलित कर देती होंगी लेकिन सरकारों तक इनकी दयनीय चीख न पहुंचने से ये ट्रको और डीसीएम में शरण लेकर खाली पेट ही घरों के लिए निकल पड़े थे। लॉक डाउन शुरू होने से लेकर आखिरी सफर तक सरकारों से कुछ न कुछ मांगते रहे लेकिन खाली हाथ चले गए। अब ये लौट कर कभी न आएंगे। विनम्र श्रद्धांजलि।

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