कोहरे के बीच ड्राइवर के अंदाजे पर ही दौड़ रहीं रोडवेज बसें

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रायबरेली- रायबरेली बस अड्डे पर कड़ाके के ठंड में आपको ऐसी रोडवेज की बसें देखने को मिलेगी जिनकी  खिड़कियां सही से बंद न होने से सरसराती हवा यात्रियों को परेशान कर रही थी।  कोहरे की दस्तक के बावजूद बसों मे फॉग लाइट नहीं लगी मौजूद है। कोहरे से निपटने का पूरा दारोमदार साधारण हेड लाइटों पर है बस में रेडियम टेप नहीं लगे थे और वाइपर भी कामचलाऊ था।

कोहरा शुरू होने से पहले ही रोडवेज की बसों की मरम्मत के लिए कार्यशालाओं को निर्देशित किया गया था। बावजूद इसके बसों की हालत में सुधार नजर नहीं आ रहा है। यह हाल कैसरबाग के अलावा आलमबाग, कमता व चारबाग से चलने वाली रोडवेज बसों का भी है। ऐसी बसों की लंबी फेहरिस्त है, जिनमें फॉग लाइटें नहीं लगी रायबरेली से लखनऊ को रवाना होने वाली बसों में भी फॉग लाइटें नहीं लगी मिलीं। इसके अलावा तमाम बसों में शीशे चिटके मिले। कई बसो मे शीशा बंद ही नहीं हो रहा था। व बसों का वाइपर भी गायब था।

कुछ ऐसा ही हाल रोडवेज की अन्य बसों का भी दिखा। कोहरे के बीच ये सिर्फ ड्राइवरों के अंदाजे पर ही दौड़ रही हैं। कोहरे से निपटने के लिए बसों में आधारभूत व्यवस्थाएं तक नहीं की गई हैं। ऐसे में यात्रियों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। फॉग लाइटें न होने से घने कोहरे में बसों का संचालन आसान नहीं होता। जिन बसों की स्टीयरिंग नए ड्राइवरों के हाथों में रहता है, वे कोहरे में ठिठक जाती हैं। इससे सफर पूरा होने में यात्रियों का ज्यादा समय बीत रहा है।

जरा एक नज़र इधर भी

सर्दी के मौसम के साथ ही कोहरे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। इसे देखते हुए परिवहन निगम ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते बसों की रफ्तार पर लगाम लगाने की पहल की है। निगम द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि कोहरा में दृश्यता कम होने पर बस रात के समय सीमित रफ्तार अथवा खड़ी करनी होगी।

परिवहन निगम ने फोग लाइट लगाने पर दिया जोर


इसको लेकर निगम के अधिकारियों की ओर से चालकों के साथ एक बैठक भी की है। इसमें कोहरे के चलते दृश्यता कम होने पर बस को सड़क किनारे खड़ा करने, सामने वाले वाहन से 50 मीटर दूरी बनाए रखने और स्पीड 50 किमी प्रति घंटा रखने के निर्देश दिए गए हैं। घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो जाती है, जिससे चालक को आगे की सड़क साफ दिखाई नहीं देती। ऐसी स्थिति में दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

अनुज मौर्य रिपोर्ट

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