इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का फैसला, अधिग्रहण और आवंटन प्रक्रिया पर उठे सवाल
रायबरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) को बड़ा झटका देते हुए मूल भूमि स्वामी को जमीन वापस करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण और उसके बाद की गई आवंटन प्रक्रिया में गंभीर खामियां रही हैं।
न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद आरडीए की आवासीय योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है, खासकर उन योजनाओं पर जहां पहले से प्लॉट और भवन आवंटित किए जा चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण के दौरान नियमों का सही पालन नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब प्राधिकरण को भुगतना होगा।
बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि का अधिग्रहण वर्षों पहले किया गया था, जिसके बाद उस पर आवासीय योजना विकसित कर प्लॉट आवंटित किए गए। लेकिन मूल मालिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूरे मामले की समीक्षा की और अंततः जमीन वापस करने का आदेश दे दिया।
इस फैसले के बाद आवंटियों में भी चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि कहीं उनका आवंटन रद्द न हो जाए या भविष्य में कानूनी विवाद का सामना न करना पड़े। वहीं, आरडीए प्रशासन अब इस आदेश के बाद आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अन्य ऐसे मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है, जहां अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर विवाद चल रहे हैं।


