बावन बुजुर्ग बल्ला में अपात्रों को बांटी गई जमीन, जांच की मांग

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रायबरेली। क्षेत्र के ग्राम सभा बावन बुजुर्ग बल्ला में कृषि हेतु भूमि के आवंटन में खूब हुई धांधली में पात्रों को कम और अपात्रों को खूब दिया गया जमीन का पट्टा। जिसका नतीजा आज भूमिहीन भूमिहीन ही रह गया। और अपात्रों को दी गयी जमीन खुलेआम बिक्री कर मोटी रकम कमा कर राजस्व विभाग को चूना लगा रहे हैं।

मामला तहसील क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला का है, जहां पांच वर्ष पूर्व शासन के निर्देशानुसार राजस्व विभाग ने करीब 300 भूमिहीनों को एक-एक बीघा जमीन देने का राजस्व विभाग ने प्रस्ताव पास किया था। जिसमें लेखपाल व मौजूदा समय में रहे उपजिलाधिकारी व तहसीलदार ने भूमिहीनों को कम और जिनके पास चार से पांच बीघा जमीन व शहरों में मकान, ट्रैक्टर, चार पहिया वाहन सहित दूसरी जगह रहने वालों पट्टा कर दिया।

जबकि शासन के आदेशानुसार उन लोगों को भूमि आवंटन की जाएगी, जिनके पास कोई भूमि नहीं है। जिससे उनका व उनके परिवार का भरण पोषण हो सके। लेकिन ऐसा नही हुआ। यहां तो शासन के आदेश को ताक पर रखकर खूब धांधली की गई।

इतना ही नहीं ऐसे लोगों को आवंटन दिया गया, जो यहां कभी रहते ही नहीं। शहर में एक नही दो तीन मकान के साथ चार पहिया लग्जरी कार मौजूद है। और कुछ ऐसे लोग आवंटन के पात्र बनाये गए हैं, जिनके पास पहले से चार चार पांच पांच बीघे जमीन मौजूद है। और एक ही घर मे पांच पांच लोगों को भूमि आवंटन कर दी गई है।

वहीं लोग आज बिना कारण व बिना शासन के परमिशन के आवंटन की गई सरकारी जमीन की बिक्री कर दिए है। ताकि आगे कभी आवंटन की लिस्ट बने तो उसमें फिर से सेटिंग गेटिंग कर आवंटन का लाभ मिल सके। जबकि जो हकीकत में बावन बुजुर्ग बल्ला गांव में भूमिहीन हैं, वह आज भी भूमिहीन ही रह गए हैं।

भूमिहीनों को भूमि न मिलने का कारण है कि लेखपाल को देने के लिए पैसा नहीं था। जबकि शासन द्वारा गरीबों में दलितों, पिछड़ों को वरीयता क्रम में रखकर पात्रता रखने वाले भूमिहीनों को पट्टा देने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन गांव की राजनीति और वोटों का लालच जनप्रतिनिधियों की भेदभाव मुक्त कार्यशैली के बीच रोड़े का काम कर गई है। शायद यही कारण है कि पात्रता रखने वाले आज भी शासन के लाभ से दूर है।

वहीं दर्जनों भूमिहीनों का कहना है लिस्ट बनाने के समय सैकड़ों बार शिकायत की गई, लेकिन पैसे के नशे में चूर अधिकारी कर्मचारी सुनने को तैयार ही नही हुए। दर्जनों भूमिहीन परिवारों ने कृषि आवंटन में हुई धांधली की शिकायत कर जांच कराने की शासन से मांग की है।

रिपोर्ट -अशोक यादव एडवोकेट

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