मिल्कीपुर, अयोध्या-ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली मनरेगा योजना में पारदर्शिता के दावों के बीच अमानीगंज विकासखंड से हाजिरी में गड़बड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। पांच ग्राम पंचायतों में नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम एनएमएमएस के जरिए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए अपलोड की गई तस्वीरों में 168 फोटो संदिग्ध पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में करीब 50 हजार रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। विभागीय स्तर पर अपलोड की गई तस्वीरों का परीक्षण किए जाने के दौरान यह मामला उजागर हुआ। संदिग्ध तस्वीरें सामने आने के बाद मनरेगा विभाग में हड़कंप मच गया। मामला अमानीगंज ब्लॉक की देवगांव, रसूलपुर लिलहा, पुरासुमेरपुर, ढोली असकरन और सरौली ग्राम पंचायतों से जुड़ा है। इन पंचायतों में श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संबंधित ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। एक रोजगार सेवक का वेतन रोक दिया गया है, जबकि संबंधित पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। डीसी मनरेगा उपेंद्र पाठक ने शनिवार को बताया कि अमानीगंज ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतों में एनएमएमएस के माध्यम से दर्ज श्रमिकों की हाजिरी की जांच के दौरान 168 तस्वीरें संदिग्ध मिली हैं। इन तस्वीरों का परीक्षण कराया जा रहा है। करीब 50 हजार रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि जिन श्रमिकों के नाम पर सरकारी धन खर्च होना था, क्या वास्तव में उन्होंने काम किया था या फिर कागजों और मोबाइल पर तस्वीरों के सहारे सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा था? विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
उमा शंकर तिवारी रिपोर्ट


