नगरपालिका की लापरवाही, गणेश विसर्जन पर पुख्ता इंतजाम नहीं

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रायबरेली। गणेशोत्सव पर्व के दौरान नगर में जगह जगह स्थापित किये गए प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन अव्यवस्था भरे माहौल के बीच किया गया। नगर के श्रद्धालुओं के द्वारा अपने अपने घरों में स्थापित किये गए भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन नगर पालिका के द्वारा बनवाये गए विसर्जन स्थल में हुआ वही प्रमुख स्थलों में विराजे गणेश जी की प्रतिमा स्थानीय सई नदी के घाट में विसर्जन हुए।
नगर पालिका के द्वारा सई नदी के निकट कोई भी विसर्जन स्थल में कोइ भी व्ययस्था नही की गई थी गणेश विसर्जन करने आए मोहित लखमानी ने मीडिया को बताया कि नगर पालिका की हठधर्मिता के कारण हम लोगो की आस्था को चोट पहुंची है। यह नगर पालिका की बहुत बड़ी कमी थी कि वह विसर्जन स्थल में पुख्ता इंतजाम नहीं कराए।

इस अव्यवस्था की होगी शिकायत


इस पूरे मामले में को लेकर गणेश पूजा समिति छोटी बाजार के गणेश समिति के अध्यक्ष अनुभव कक्कड़ व सदस्यों का कहना था कि नगर पालिका के चुने हुए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और नपा प्रशासन की हठधर्मिता के कारण अव्यवस्थाओं के बीच अंधेरे में मूर्तिया विसर्जन किया गया है जो गलत हुआ। यदि नगर पालिका सही तरीके की व्यवस्था करती तो भक्तों को परेशानी ना खेली पड़ती वही मूर्ति विसर्जन के लिए एनजीटी के सख्त निर्देश है कि विसर्जन गड्ढे खोदकर उसी में मूर्ति विसर्जित की जाए पर ऐसा नही हुआ।


सई नदी में हुआ प्रतिमा का विसर्जन


गौरतलब है नगर पालिका के द्वारा कोई भी विसर्जन के लिए व्यवस्था नहि की गई थी न तो रैंप ही बनाया गया था भक्त लोग अपनी जान हथेली में लेकर गणेश विसर्जन करने के लिए सई नदी पर जा रहे थे तो वहीं गंदगी का पूरे नदी किनारे अंबार लगा हुआ था जिससे गणेश विसर्जन करने आए भक्तों में खास नाराजगी देखने को मिली।


जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी


नगर पालिका के द्वारा गणेश विसर्जन के लिए कोई भी व्यवस्था ना करवाना सवाल खड़ा कर रहा है। लेकिन नगर पालिका के कुछ जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इन अव्यवस्था से वाकिफ होने के बावजूद अपनी जिद पर अड़े रहे, और कई तरह के चर्चाओं को जन्म दे रहा है। ध्यान देने योग्य बात तो यह है कि इस बात की खबर सोशल मीडिया प्रसारित हुई। लेकिन नपा के हेकड़ी स्थापित करने वाले कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में चुप्पी साधते हुए यह बता दिया कि वह धार्मिक आस्था से ज्यादा अपने गुरुर को महत्व देते है। बहरहाल इस मामले में जनप्रतिनिधियों ने यह सिद्ध कर दिया कि उनको अपने व्यक्तिगत जीवन से बढक़र इन बातों से कोई सरोकार नही।

अनुज मौर्य रिपोर्ट

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