सदर कोतवाल शिव शंकर सिंह की तत्परता काम आई संज्ञान लेते ही सीज कर दिया गया साइबर लुटेरों का अकाउंट
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली में साइबर ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर एक पूर्व फौजी दंपती से करीब 82.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर दंपती को छह दिन तक मानसिक दबाव में रखा और अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई।
पीड़ित के अनुसार 11 अप्रैल को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने उन पर काला धन रखने और आतंकियों से संबंध होने का आरोप लगाया। इसके बाद दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया और किसी से संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी गई। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 11 से 16 अप्रैल के बीच कई किश्तों में कुल 82.50 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए।
रकम IndusInd Bank (नोएडा) और Yes Bank (पश्चिम बंगाल शाखा) के खातों में भेजी गई। 16 अप्रैल को पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर पुलिस अधीक्षक रवि कुमार से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एसपी के मुताबिक, त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 31 लाख रुपये होल्ड करा दिए गए हैं, जबकि नोएडा और पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ समन्वय कर आगे की जांच जारी है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी?
साइबर अपराधी खुद को पुलिस या केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं। वे वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को घंटों या दिनों तक जोड़े रखते हैं और “जांच” या “सेटलमेंट” के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसी किसी भी कॉल से सतर्क रहें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।


